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बैल के लिए लड़े दो पक्ष, दोनों को मिली सजा

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हरदोई। एक बैल को लेकर दो पक्ष आपस में भिड़ गए थे। इसमें एक व्यक्ति की जान भी चली गई थी। सात साल बाद कोर्ट ने इस मामले से जुड़े दोनों पक्षों के अलग-अलग मुकदमों को एक साथ निस्तारित कर दिया।
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अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दोनों पक्षों के लोगों को अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही दोनों को आर्थिक मदद दिए जाने के आदेश भी दिए हैं। वहीं गैर इरादतन हत्या में एक पक्ष के चार लोगों को 10 वर्ष की सजा भी सुनाई है।
अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट हेमेंद्र कुमार सिंह ने 1 अप्रैल 2015 की घटना से जुड़े दो मुकदमों पर फैसला सुनाया। वाकया कोतवाली देहात के अल्लीपुर गांव का है।
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सात वर्ष पूर्व एक अप्रैल 2015 की सुबह 9:30 बजे अल्लीपुर गांव निवासी रामऔतार पाल अपना खेत जोत रहा था। उसी दौरान उसका बैल जमुना प्रसाद के खेत में चला गया।
इस पर जमुना प्रसाद और रामऔतार में विवाद हो गया। झगड़ा बढ़ने पर जमुना प्रसाद ने पत्नी प्रेमशीला व बेटों नंदू उर्फ नंदराम और जितेन्द्र के साथ लाठी डंडे व बांके से हमला कर दिया।
इससे रामऔतार व उसकी पत्नी छोटी बिटिया को चोटें आईं। जिला अस्पताल में छोटी बिटिया को डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया था। दूसरी तरफ जमुना प्रसाद ने भी रामऔतार व उसकी पत्नी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इसमें कहा गया कि उसके खेत में बैल के नुकसान करने पर रामऔतार ने पत्नी के साथ मिलकर लाठी व बांके से प्रहार किया। इससे उसके बेटे जितेंद्र का अंगूठा कट गया।
न्यायाधीश ने शासकीय अधिवक्ता अमलेंद्र सिंह व प्रमेंद्र कुमार सिंह और बचाव पक्ष अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के बाद फैसला सुनाया।
न्यायाधीश ने जमुना प्रसाद, प्रेमशीला, नंदराम व जितेंद्र सभी को अलग अलग धाराओं में 15-15 हजार रुपये के अर्थदंड के साथ दस वर्ष के कारावास की सजा दी। अर्थदंड में 75 प्रतिशत राशि मृतका के विधिक वारिस को देने का आदेश दिया।
इसी मामले में चल रहे दूसरे मुकदमे में अभियुक्त रामऔतार को दस हजार रुपये के जुर्माने के साथ चार वर्ष के कारावास की सजा दी सुनाई। जुर्माने में 75 प्रतिशत धनराशि घायल जितेंद्र को देने का आदेश दिया गया।
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