हरदोई। मां शक्ति स्वरूपा के शुक्रवार को मंदिरों और घरों में आगमन को लेकर गुरुवार को हर जगह तैयारियों का दौर जारी रहा। मंदिर में जहां पुजारियों से लेकर श्रद्धालु तक साफ सफाई मेें जुटे रहे, वहीं घरों में भी मां के आने की खुशी में श्रद्धालु डूबे नजर आए। घरों से लेकर मंदिरों और बाजारों में लोग सात दिन मां के नाम करने के लिए तैयारियों में जुटे दिखे।
शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि शुक्रवार को पहले दिन माता दुर्गा की प्रतिमा और कलश की स्थापना की जाएगी। कलश स्थापना के लिए शुक्रवार को सुबह से दोपहर दो बजकर 26 मिनट तक कलश स्थापना के लिए मुहूर्त शुभ है। मां का आगमन अश्वनी नक्षत्र में होगा। बताया कि पवित्र स्थान की मिट्टी से वेदी बनाकर उसमें जौ, गेहूं बोएं।
फिर उनके ऊपर अपनी शक्ति के अनुसार बनवाए गए सोने, तांबे और मिट्टी के कलश को विधिपूर्वक स्थापित करें। कलश के ऊपर सोना, चांदी, तांबा, मिट्टी, पत्थर या चित्रमयी मूर्ति की प्रतिष्ठा करने का विधान है। मूर्ति यदि कच्ची मिट्टी, कागज या सिंदूर आदि से बनी हो और स्नानादि से उसमें विकृति आने की संभावना हो तो उसके ऊपर शीशा लगा दें। मूर्ति न हो तो कलश के पीछे स्वास्तिक व उसके दोनों कोनों में बनाकर दुर्गाजी का चित्र पुस्तक और शालग्राम को विराजित कर भगवान विष्णु का पूजन करें।
उन्हाेंने बताया कि पूजन सात्विक हो, राजस या तामसिक नहीं, इस बात का विशेष ध्यान रखें। इधर, मां के आगमन को लेकर शहर की बाजार पूजन सामग्री से सुशोभित नजर आए। देर शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ रही। धूप, अगरबत्ती, घी, पान, सुपाड़ी, लौंग, चुन्नी आदि की खरीदारी होती रही। इसके अलावा पूजन को लेकर फलों की बिक्री भी हाथों हाथ हुई।
प्रथम दिन मां शैलपुत्री की आराधना
चैत्र नवरात्र का आरंभ शुक्रवार से हो रहा है। प्रथम दिन मां शैलपुत्री के स्वरूप का पूजन किया जाएगा। मां शक्ति की आराधना, उपासना, उपवास करने से मनुष्य को शारीरिक व मानसिक शक्ति मिलती है। नवरात्र में मां के नौ रूपों का पूजन किया जाता है।
पहले स्वास्तिक वाचन शांतिपाठ करके लें संकल्प
हरदोई। नवरात्रि व्रत के आरंभ में स्वास्तिक वाचन शांति पाठ करके संकल्प करें और सर्वप्रथम भगवान श्री गणेश की पूजा करें। फिर मुख्य मूर्ति का षोडशोपचार पूजन करें। दुर्गा देवी की आराधना अनुष्ठान में महाकाली महालक्ष्मी, महा सरस्वती का पूजन व श्री दुर्गा सप्तसप्तमी का नियमित रूप से पाठ करने से श्रद्धालुओं को लाभ होगा।
पूजन में वास्तु का भी है महत्व
मां के व्रत से पूर्व उनकी मूर्ति स्थापना व कलश स्थापना में भी यदि वास्तु का ख्याल रखा जाए तो मां की कृपा दोगुनी हो सकती है। ईशान कोण यानि उत्तर पूर्व में मां की मूर्ति एवं कलश की स्थापना की जाए तो अच्छा है। यदि अखंड को जलाना हो तो उसे आग्नेय कोण यानी पूर्व दक्षिण में रखा जाए। पूजन करते समय मुंह पूर्व व उत्तर दिशा में रखा जाए। ध्यान रखा जाए कि पूजन का स्थल पवित्र हो, स्नानघर आदि से भी पर्याप्त दूरी हो।