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बातों में ही इंतजाम, सफाई व्यवस्था धड़ाम

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हरदोई। शहर में साफ सफाई व्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतर चुकी है। जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते चोक नाले और नालियां मच्छरों की पनाहगार बन चुकी हैं।
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कहीं असरदारों की दबंगई ने व्यवस्था को बिगाड़ दिया है तो कहीं व्यवस्था के जिम्मेदारों ने धड़ाम कर दिया है। जानकारों के अनुसार, जन सामान्य के स्वास्थ्य के लिए इस तरह की अव्यवस्था खतरे की घंटी बजा रही है।
नगर पालिका के चेयरमैन एवं ईओ के निर्देश के बाद भी व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है। शहर के घंटाघर रोड पर नाला चोक है, जिसकी वजह से गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
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सदर तहसील के पास बने कूड़ा स्थल का कूड़ा नाले तक पहुंच रहा है। इसके कारण नाला कई स्थानों पर चोक है। इसी रोड पर क्रास नाला को पाट कर व्यावसायिक प्रयोग हो रहा है।
जिससे नालों की सफाई नहीं हो पाती है। नाला पाटने की दबंगई के आगे नगर पालिका के अफसर और कर्मचारी भी खामोश हैं। उधर, जिला अस्पताल के बाहर नाली भी पूरी तरह से चोक हो रखी है।
जिला अस्पताल के पास अपने विभाग के सफाई कर्मचारी हैं, लेकिन उन्हें भी इस ओर परवाह नहीं है। हर किसी को नगर पालिका से व्यवस्था की दरकार है। यहां चोक नाली जिम्मेदारों को आईना दिखा रही है।
साथ ही बीमारियों को भी दावत दे रही है। नाली चोक होने से मच्छरों का पूरी तरह से बसेरा हो गया है। इसी तरह आवास विकास में पानी की टंकी के पास नाली के चोक होने से भी गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
इतना ही नहीं आवास विकास में कई स्थानों पर नाला-नाली चोक हो रखे हैं। कई स्थानों पर नालों को साफ करने के लिए व्यवस्था ही नहीं बची है। ऐसे में चोक नालियां मच्छरों की पनाहगार बनी हुई हैं।
सरकुलर रोड नघेटा पूर्वी में नाला चोक
नघेटा पूर्वी का ड्रेनेज आवास विकास से लेकर नघेटा रोड एवं सरकुलर रोड से जुड़ा हुआ है। इस एरिया में होटल, रेस्टोरेंट, खाद्य एवं पेय पदार्थों की दुकानें काफी संख्या में हैं।
कई स्थानों पर होने वाले समारोहों के दोना-पत्तल, पॉलिथीन आदि सीधे नालों में पहुंच कर चोक कर देते हैं। इससे यहां पर गंदगी के साथ ही मच्छरों की भी भरमार हो गई है।
बोले लोग
विभूती नगर निवासी स्वदेश, रेलवेगंज निवासी गोविंद, सांडी रोड निवासी अमर, आवास विकास निवासी अनूप का कहना था कि कुछ समय पूर्व तक इतनी दिक्कतें नहीं थीं।
बताया कि पिछले कुछ समय से शहर में साफ-सफाई की व्यवस्था भी बिगड़ी है। इसके साथ ही नालों एवं नालियों में दवाओं का छिड़काव आदि नहीं हो रहा है। फागिंग भी नहीं हो रही है।
इससे चोक नालों एवं नालियों से पनपने वाला लार्वा मच्छर बनकर लोगों के घरों में धावा बोल रहा है। मच्छरों ने दिन का चैन रात का सुकून छीन लिया है।
दवाओं का साप्ताहिक छिड़काव जरूरी
मच्छरों की तादाद बढ़ने के पीछे मौसम का असर है। मच्छरों में रजिस्टेंश बन गया है, जिससे अबकी मच्छरों पर घरों में प्रयोग की जाने वाले मच्छररोधी साधन भी बेअसर हो रहे हैं।
लखनऊ में हुई कार्यशाला में यह बात सामने आई कि मच्छरों के लार्वा को बनने से रोकने के साथ उसे ही नष्ट करना होगा।
इसके लिए घरों से लेकर सार्वजनिक नालों एवं नालियों के ढक्कनों को हटाकर लार्वा नष्ट करने वाली दवाओं का छिड़काव किया जाना चाहिए। दवा का छिड़काव साप्ताहिक होना चाहिए।
- डॉ. जितेंद्र सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी
शहर में सफाई व्यवस्था दुुुरुस्त रखने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा शहर में फागिंग का कार्य भी शुरू कराया गया है। दवाओं का छिड़काव भी कराया जा रहा है। यदि कहीं व्यवस्थाएं ठीक नहीं हैं तो उसको भी दुरुस्त कराया जाएगा।
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- सुखसागर मिश्रा, चेयरमैन, नगर पालिका, हरदोई
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