हरदोई। गांवों में विकास और राशि के खर्च का क्षेत्र पंचायतों ने हिसाब नहीं दिया है। वर्ष 2022-23 के अभिलेखों का ऑडिट नहीं कराया गया है। ॉ
ऑडिट न कराने से विकास और खर्च की पड़ताल नहीं हो पाई है। 30 अप्रैल तक ऑडिट न कराने पर चालू वित्तीय वर्ष में मिलने वाली राशि पर रोक लग सकती है।
पंचायतीराज विभाग की ओर से क्षेत्र पंचायतों को राज्य वित्त आयोग और 15वें वित्त आयोग की मद में विकास कार्यों सहित अन्य कामों के लिए बड़ी मात्रा में राशि जारी की जाती है। राशि के खर्च और कराए गए कामों के ऑडिट कराए जाने की भी व्यवस्था होती है। यहां पर 19 क्षेत्र पंचायतों में से एक ने भी वित्तीय वर्ष 2022-23 में मिली राशि के खर्च का हिसाब नहीं दिया है।
क्षेत्र पंचायतों की ओर से ऑडिट न कराए जाने और इसकी रिपोर्ट ऑनलाइन फीड न होने से पंचायतीराज विभाग ने गंभीरता से लिया। पंचायतीराज विभाग की ओर से वर्ष 2022-23 के अभिलेखों के ऑडिट के लिए 30 अप्रैल और वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए दिसंबर 24 तक की समयावधि तय की गई है।
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने सभी खंड विकास अधिकारियों और सहायक विकास अधिकारियों को पत्र जारी कर कहा कि निर्धारित समयावधि में राज्य वित्त और 15वें वित्त आयोग की मद के खर्च का ऑडिट करा लिया जाए। इसमें लापरवाही पर संबंधित की जिम्मेदारी तय की जाएगी। जिला पंचायत राज अधिकारी विनय कुमार सिंह ने बताया कि शासन ने ऑडिट न कराने वाली पंचायतों को चालू वित्तीय वर्ष में 15वें वित्त आयोग की मद की राशि जारी न किए जाने की व्यवस्था की है।
क्षेत्र, ग्राम पंचायतों के साथ ही जिला पंचायतों को भी राज्य वित्त आयोग और 15वें वित्त आयोग की मद की राशि के खर्च के ऑडिट की व्यवस्था है। वर्ष 2022-23 में प्राप्त राशि और खर्च का जिला पंचायत ने भी ऑडिट नहीं कराया है।