हरदोई। सीतापुर मार्ग पर सई नदी (भैंसटा) के इटौली स्थित लगभग चार दशक पुराने पुल की हरदोई से जाने पर दोनों लेन की एप्रोच धंसी गई। सीतापुर से आने पर एक लेन की एप्रोच पूरी तरह चिटक गई है। फिलहाल भारी वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है। वहीं एप्रोच धंसने के बाद भी लोक निर्माण विभाग या एनएच का कोई जिम्मेदार मौके पर जायजा लेने नहीं पहुंचा।
हरदोई से सीतापुर की दूरी लगभग 72 किलोमीटर है। इसी सड़क पर हरदोई से लगभग 10 किलोमीटर दूर इटौली गांव के पास सई नदी पर मुख्य मार्ग पर ही पुल है। पिछले दो दिन से हो रही बारिश के कारण शनिवार शाम पुल की एप्रोच धंस गई। सड़क के बायीं और दायीं ओर एप्रोच धंस जाने से बीच में सिर्फ एक वाहन के ही निकलने की जगह बची है। इसकी जानकारी पर एसडीएम सदर मयंक कुंडू और सीओ सिटी अजीत चौहान मौके पर पहुंचे। इसके बाद इस मार्ग पर भारी वाहनों का आवागमन बंद करा दिया गया। सीतापुर की तरफ से टड़ियावां मोड़ पर बैरिकेडिंग लगाकर पुलिस तैनात की गई है। हरदोई की तरफ से महाेलिया बाईपास के पास दो पुलिस कर्मी तैनात कर बैरियर लगाया गया है। कोतवाल समर बहादुर सिंह ने एप्रोच के चारों तरफ ड्रम रखवाकर रेडियम रोल और रिफलेक्टर लगवाए हैं।
प्वाइंटर
.सीतापुर की तरफ से आने वाले भारी वाहनों को टड़ियावां से गोपामऊ और पिहानी होते हुए हरदोई निकाला जा रहा है।
.हरदोई से सीतापुर जाने वाले भारी वाहनों को उक्त मार्ग के साथ ही बघौली चौराहा होते हुए जाने की हिदायत दी गई।
4:30 बजे ही दे दी गई थी सूचना, जिम्मेदार पहुंचे ही नहीं
पुलिस विभाग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि एप्रोच धंसने की सूचना लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को दे दी गई थी। दोपहर 4:30 बजे सूचना देने के बाद भी रात तक कोई विभागीय जिम्मेदार नहीं पहुंचा। ऐसे में लोगों को हादसे से बचाने के लिए पूरी कवायद पुलिस को ही करनी पड़ी। मार्ग निर्माण से जुड़े कार्याें के लिए लोक निर्माण विभाग के नोडल अधिकारी प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता एमडी गंगवार नोडल अधिकारी हैं लेकिन उन्होंने बताया कि पुल एनएच के अधीन है। माना जा रहा है कि इसी वजह से वह मौके पर नहीं गए। उनका कहना था कि एनएच के नोडल अधिकारी भी वह नहीं हैं।
अक्तूबर 2021 में एनएच को हस्तांतरित हुई थी सड़क
हरदोई सीतापुर मार्ग बिलरायां पनवारी मार्ग के अधीन आता है। लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदारों का दावा है कि लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय मार्ग खंड कानपुर को यह सड़क अक्तूबर 2021 में हस्तांतरित कर दी गई थी। इसके बाद से मरम्मत से लेकर सड़क की दशा सुधार तक का सारा कार्य कानपुर से ही होता है।