हरदाेई। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में दाई और अप्रशिक्षित आशा से प्रसव के मामलों पर रोक लगाने के लिए एएनएम को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने संस्थागत व सुरक्षित प्रसवों को बढ़ावा देने के लिए सभी सीएचसी पर कार्यरत एएनएम को प्रसव कराने का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है। अभी तक 60 एएनएम को प्रशिक्षित भी किया जा चुका है और उन्हें प्रसव कराने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से सरकारी चिकित्सालयों में संस्थागत प्रसवों को लेकर काफी जोर दिया जा रहा है। चूंकि, सीएचसी पर पर्याप्त गायनेकोलॉजिस्ट की कमी है। इससे तमाम लोग अभी भी अपने घर पर ही प्रसव करा लेते हैं। यह प्रसव अप्रशिक्षित कर्मचारियों या फिर दाइयों के माध्यम से होते हैं। इसमें गर्भवती और होने वाले बच्चे संग अनहोनी की संभावना बनी रहती है। इस पर लगाम लगाने के लिए शासन ने स्वास्थ्य विभाग को संस्थागत व सुरक्षित प्रसवों को बढ़ाने के लिए एएनएम को प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए हैं।
बता दें कि जिले में एएनएम को प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया गया है। प्रत्येक सीएचसी से पांच-पांच एएनएम प्रशिक्षित की जा रही हैं। इसमें से प्रथम बैच की 60 एएनएम को प्रशिक्षित किया जा चुका है। साथ ही उन्हें प्रसव कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
माह में पांच प्रसव कराने के निर्देश
एएनएम को स्किल बर्थ अटेंडेंट का प्रशिक्षण दिया गया है। एएनएम को डमी के माध्यम से सभी तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया जा रहा है। प्रशिक्षण में बेसिक प्रक्रियाओं और उनमें आने वाली जटिलताओं को पहचान कर इलाज करने और सुरक्षित संस्थागत प्रसव के बारे में बताया गया है। साथ ही एएनएम को हर माह पांच-पांच प्रसव कराने के निर्देश दिए गए हैं। एएनएम को प्रशिक्षण दिए जाने के बाद बीते माह 210 प्रसव भी कराए गए हैं।
संस्थागत प्रसवों को बढ़ाने के लिए एएनएम को प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है। प्रथम बैच अभी कुछ दिन पहले समाप्त हुआ है अब दूसरा बैच प्रशिक्षण ले रहा है। इसका उद्देश्य गर्भवतियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाना है। -डॉ. भवनाथ पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी