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Hardoi News: किशोरी से दुष्कर्म में कथित प्रेमी को सात साल की सजा, पूर्व प्रधान बरी

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हरदोई। नाबालिग से दुष्कर्म के नौ साल पुराने मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) मनमोहन सिंह ने कथित प्रेमी को दोषी करार दिया। अभियुक्त को सात साल की सजा सुनाते हुए 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना न देने पर अभियुक्त को तीन माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। सह आरोपी बनाए गए पूर्व प्रधान को साक्ष्यों के अभाव में न्यायालय ने बरी कर दिया है। खास बात यह है कि किशोरी ने पुलिस से लेकर न्यायालय तक में तीन बार बयान बदले।
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बेहटा गोकुल थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी शख्स ने 10 अप्रैल 2017 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि उसकी पुत्री (15) कक्षा आठ में पढ़ती थी। 21 मार्च 2017 को स्कूल से लौटने के बाद लापता हो गई थी। आरोप लगाया था कि गांव का ही अवधेश उसे बहलाकर ले गया। गांव के ही ओमपाल, रामस्वरूप और उत्तम पर भी सहयोग करने का आरोप लगाया था।
10 अप्रैल 2017 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। 22 मई 2017 को थाने पहुंची किशोरी ने पुलिस को बताया कि अवधेश से उसका प्रेम प्रसंग था। मां के डांटने से नाराज होकर अपनी मर्जी से साथ गई थी। दोनों ने मंदिर में शादी की और पति-पत्नी की तरह रहने लगे थे। इसके बाद 24 मई को मजिस्ट्रेट के सामने किशोरी ने बयान बदल दिए। इस बार उसने कहा कि अवधेश, ओमपाल, उत्तम और रामस्वरूप उसे जीप से जबरन हिमाचल प्रदेश ले गए थे। यहां अवधेश ने दुष्कर्म किया था। पूर्व प्रधान सुशील कुमार के कमरे पर रखा था और सुशील ने भी दुष्कर्म किया था।
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इसके बाद जिरह के दौरान 21 जुलाई 2025 को किशोरी ने न्यायालय में पूर्व में दिए गए बयानों को नकार दिया। उसने कहा कि पूर्व में बयान ग्रामीणों और पुलिस के दबाव में दिए थे। कहा कि पूर्व प्रधान सुशील को नहीं जानती और न ही सुशील ने उसके साथ कोई गलत काम किया। अदालत ने स्कूल के एसआर रजिस्टर और रेडियोलॉजिकल जांच समेत उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। इससे घटना के समय पीड़िता की उम्र करीब 17 वर्ष 11 माह सामने आई थी। अपर जिला जज ने मामले में अवधेश को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। पूर्व प्रधान सुशील को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।


नाबालिग की सहमति भी कानून की नजर में शून्य
किशोरी के बयानों से यह बात साफ हुई थी कि वह अपनी इच्छा से अवधेश के साथ गई थी। जबरन ले जाने या बहलाकर ले जाने के आरोपों से अवधेश को बरी किया गया। किशोरी नाबालिग थी, ऐसे में उसकी सहमति भी कानून की नजर में बेअसर रही और अवधेश को पॉक्सो व दुष्कर्म की धाराओं में सजा सुनाई गई।
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