हरदोई। कोरोना संक्रमण और लोकतंत्र के महाकुंभ की तैयारियों के बीच जिले के 115 वर्ष पुराने रामलीला व मेला की परंपरा को बचाने के प्रयास शुरू हो गए हैं।
तमाम विपरीत परिस्थितियों और प्रतिकूल समय के बाद भी रामलीला मेले की परंपरा कभी टूटी नहीं है। इस बार संक्रमण के साथ चुनावी ड्यूटी में सुरक्षा संसाधनों की व्यस्तता भी प्रशासन के लिए चुनौती है।
रामलीला कमेटी ने 16 फरवरी को भूमि पूजन कर रामलीला और प्रदर्शनी का शुुभारंभ करने की अनुमति प्रशासन से मांगी है। प्रशासन भी मेला कराने के पक्ष में है, लेकिन सुरक्षा बलों की चुनावी व्यस्तता के कारण अभी किसी निर्णय पर नहीं पहुंच सका है।
एक शताब्दी से गंगा-जमुनी तहजीब का गवाह रहा शहर का ऐतिहासिक रामलीला मेला इस बार अभी शुरू नहीं हो सका है। आमतौर पर मेले का भूमिपूजन जनवरी माह में हो जाता है, लेकिन इस बार संक्रमण के कारण पहले ही देर हो चुकी है।
अब जब संक्रमण में कमी आई, तो एक बार फिर रामलीला मेला शुरू कराने को लेकर प्रयास किए जाने लगे हैं। रामलीला व कृष्ण लीला से लोगों की आस्था भी जुड़ी रही है।
रामलीला की खासियत यह है कि यहां सभी धर्म समुदाय के लोग लीला का मंचन करने आते हैं। ब्रिटिश शासनकाल से यह परंपरा निरंतर जारी है। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष रामप्रकाश शुक्ला के मुताबिक, 16 फरवरी से रामलीला व मेला का शुभारंभ कराने की तैयारी है।
यदि प्रशासन अनुमति देगा तो 16 फरवरी को भूमिपूजन कर रामलीला की शुरुआत करा दी जाएगी।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक मेले का शोर
रामलीला मेला शहर में ही नहीं पूरे देश में पहचान रखता है। 115 वर्षों से अपने निर्धारित समय पर लगने वाले मेले के लिए उत्तराखंड, मुरादाबाद, बरेली, संभल के अलावा देश की सरहद पर बसे कश्मीर और कन्याकुमारी तक से लोग यहां दुकानें लगाने आते हैं।
दूर-दूर से लोग रामलीला देखने और मेले का लुत्फ लेने यहां आते हैं, इसलिए दुकानदारों की खरीदारी भी अच्छी होती है।
मेले से अमर हैं एक ब्रिटिश कलक्टर
ब्रिटिश शासन में यहां कलेक्टर रहे एयू ह्यूम को इस ऐतिहासिक नुमाइश के साथ जोड़कर याद रखा जाता है। अंग्रेजी हुकूमत के प्रति आम धारणा अच्छी नहीं रही। एके ह्यूम ने ही इस मेले की नींव रखी थी।
उन्होंने 1906 में फ्लावर एग्जिविजन के नाम से इसकी शुरुआत की थी। इसी समय से यहां रामलीला भी हो रही है। रामलीला के अलावा फ्लावर एग्जिवीजन और केटल एग्जिविजन ही यहां की विशेषता थे।
बाद में मेला कमेटी के अस्तित्व में आने के बाद इसका नाम बदलकर रामलीला मेला कर दिया गया।
संक्रमण ही नहीं चुनावी ड्यूटी में सुरक्षा संसाधनों व व्यस्तता का भी विषय है। पुलिस अधिकारियों से वार्ता के बाद ही मेला लगवाने की मांग पर किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है। अभी निर्णय में कुछ समय लगेगा।
- सदानंद गुप्ता, नगर मजिस्ट्रेट