16 फरवरी यानी मंगलवार को महाशिवरात्रि जिले भर में
श्रद्धापूर्वक मनाई जाएगी। भोले बाबा की शिवरात्रि वैसे ही सभी के लिए शुभ
मानी जाती है, पर 48 बरस बाद बनने वाले शिवरात्रि के दुर्लभ संयोग ने इस
पर्व को और भी शुभ बना दिया है।
शास्त्रों के जानकारों की माने तो गुरु के
साथ इस महाशिवरात्रि पर शुक्र भी उच्च राशि में नजर आएगा, जो दुर्लभ ही
नहीं, बल्कि शुभ समय लेकर आया है। महाशिवरात्रि मंगलवार को होगी।
शास्त्रों के जानकारों की माने तो यह दिन गुरु, गृह की पूजा के लिए भी खास
होते हैं।
शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि शिवरात्रि के योग में किए
गए उपाय से शिवजी के साथ ही विष्णु, लक्ष्मी और देव गुरु की भी कृपा
प्राप्त होगी। महाशिवरात्रि पर मंगलवार को वर्ष 67 के बाद गुरु-शुक्र उच्च
राशि में होंगे। बुध व चंद्र की युति मकर राशि में होगी।
मंगल मित्र राशि
मीन में होगा। बताया कि वर्ष 67, 79, 91, 03 में महाशिवरात्रि के दिन गुरु
उच्च राशि में था, पर शुक्र वर्ष 67 के बाद वर्ष 15 में गुरु के साथ उच्च
राशि में नजर आ रहा है। शिवरात्रि पर अधिकतर बुध और चंद्र की युति रहती है।
बताया
कि शुक्र उच्च का होता है, इसलिए यह महाशिवरात्रि बहुत ही शुभ संयोग लेकर
आई है। बुध चंद्र मकर राशि में है। जिन पर गुरु की पूर्ण सप्तम दृष्टि पड़
रही है, साथ ही उच्च का शुक्र भी मीन राशि में स्थित है। जिस पर उच्च के
गुरु की नवम् दृष्टि पड़ रही है।
शास्त्री ने बताया कि इस संयोग से 12
राशियों पर भी असर पड़ेगा। बताया कि विधि विधान से भोले बाबा का पूजन करने
को सूर्योदय से पहले ही बिस्तर का त्याग करें। स्नान आदि करके पवित्र
कपड़ों को धारण करें। मंदिर जाए व शिवलिंग का पूजन करें। इस दिन व्रत रखने
वाले क्रोध कतई न करें और ऊं नम: शिवाय का जाप करें।