हरदोई। शहर के सनसनीखेज अधिवक्ता हत्याकांड का खुलासा पुलिस आज कर सकती है। मकान खाली न करने के विवाद में अधिवक्ता की हत्या किए जाने की बात अब तक की विवेचना में सामने आई है। सीसीटीवी फुटेज और अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर पुलिस न सिर्फ हत्यारों तक बल्कि साजिश रचने वालों तक भी पहुंच गई है।
फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता कनिष्क मेहरोत्रा (69) की मंगलवार रात उनके मकान में ही बने कार्यालय में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या से पूरे शहर में खलबली मच गई थी और अधिवक्ताओं में रोष व्याप्त हो गया था। आईजी लखनऊ प्रशांत कुमार ने बुधवार को घटनास्थल का जायजा लेकर जल्द खुलासे का दावा किया था।
अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी नृपेंद्र के नेतृत्व में घटना का खुलासा करने के लिए एसपी नीरज कुमार जादौन ने पांच टीमें गठित की थीं। महकमे से जुड़े विश्वस्त सूत्राें के मुताबिक कनिष्क मेहरोत्रा की हत्या करने और हत्या की साजिश रचने वालों तक पुलिस पहुंच गई है। हत्यारों तक पहुंचने के लिए सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस पुलिस के लिए खासा मददगार साबित हुआ। पूरी उम्मीद है कि शुक्रवार को पुलिस पूरी घटना का खुलासा कर देगी।
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक कनिष्क मेहरोत्रा लखनऊ रोड पर सिनेमा चौराहे के पास स्थित एक मकान में पिछले 40 साल से किराए पर रहे हैं। इस मकान को लगभग 15 साल पहले चार लोगों ने मिलकर खरीदा था। मकान खरीदने वालों में सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष बीरेंद्र यादव बीरे, नृपेंद्र त्रिपाठी, शिखर गुप्ता आदि शामिल हैं।
मकान में रहने वाले ज्यादातर किरायेदारों ने आपसी समझौता कर मकान छोड़ दिया था, लेकिन कनिष्क मेहरोत्रा ने मकान नहीं छोड़ा। चर्चा है कि मकान खरीदने वाले लोग यहां पर एक बड़ा वाणिज्यिक उपक्रम शुरू करना चाहते थे और इसलिए अधिवक्ता से कई बार बातचीत के जरिए मकान खाली कराने की बात की। इसके बावजूद बात नहीं बनी। माना जा रहा है कि इसी विवाद के चलते कनिष्क मेहरोत्रा की हत्या की गई।
पुलिस को मामले की जांच के दौरान पता चला कि कनिष्क मेहरोत्रा की हत्या सुनियोजित ढंग से कराई गई है। इसके लिए सुपारी भी दिए जाने की चर्चा है। घटना को अंजाम देने वाले शूटर भी स्थानीय ही बताए जा रहे हैं। कितने रुपये की सुपारी हत्या करने के लिए दी गई थी, इसका खुलासा भी शुक्रवार को ही होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव उर्फ बीरे का काला चिट्ठा भी खोल दिया। मुख्यमंत्री ने अधिवक्ता हत्याकांड में सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष बीरे यादव के शामिल होने की बात कहते हुए यह भी कहा कि बीरे यादव पर 28 मुकदमे दर्ज हैं। बीरे यादव हिस्ट्रीशीटर है। पहला मुकदमा 1989 में दर्ज हुआ था और कई मुकदमे तो सपा शासन काल में ही दर्ज हुए। मुख्यमंत्री के सदन में दिए गए बयान के बाद यह भी स्पष्ट हो गया कि घटना में बीरे यादव शामिल है। हालांकि, अभी पुलिस ने इस मामले पर कोई औपचारिक बयान नहीं दिया है।
हरदोई। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि प्रदेश में जंगलराज कायम है। कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। सांडी में किशोरी के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई तो हरदोई शहर में वरिष्ठ अधिवक्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई। दोनों घटनाओं को अंजाम देने वाला कोई भी हो और किसी भी दल से जुड़ा हो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। दोनों घटनाओं की जांच के लिए एसआईटी गठित किए जाने की मांग भी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने की।
बृहस्पतिवार को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय सबसे पहले सांडी थाना क्षेत्र में हुई घटना में परिजनों से मिले। उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। इसके बाद अधिवक्ता कनिष्क मेहरोत्रा के आवास पर पहुंचकर उनके पुत्र, बेटी और दामाद से मुलाकात की। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में अजय राय ने कहा कि पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है। जौनपुर औ एटा में भी गंभीर वारदातें हुई हैं। मुख्यमंत्री के विधानसभा में दिए गए एक बयान को लेकर अजय राय ने कहा कि बुलेट चलाएं या वंदेभारत, लेकिन कानून व्यवस्था मजबूत करें।
गोरखपुर में हरिशंकर तिवारी की प्रतिमा स्थापित करने के लिए बन रहे चबूतरे को गिरवाना उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। कहा कि हरिशंकर तिवारी बड़े नेता थे। कई बार कैबिनेट मंत्री रहे। अगर उनके समर्थक प्रतिमा स्थापित करना चाहते हैं तो इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। केशव मौर्या के बयान संगठन सरकार से बड़ा पर प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि केशव मौर्या तो सिर्फ मुखौटा हैं। केंद्र और प्रदेश के बीच बन नहीं रही है। अजय राजय के दौरे के दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष आशीष सिंह सोमवंशी, सुभाष पाल, विक्रम पांडेय, जमील अहमद अंसारी, अनुपम दीक्षित, ओमेंद्र कुमार वर्मा, निर्भान सिंह यादव, सुनीता देवी, डॉ. राजीव कुमार सिंह लोध आदि मौजूद रहे।