कछौना। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बृहस्पतिवार को कछौना में एक अस्पताल और एक क्लीनिक पर छापा मारा। बिना किसी डिग्री और चिकित्सक के संचालित अस्पताल को सील कर संचालक को पुलिस के हवाले कर दिया गया। क्लीनिक का संचालन कर रहा ऑपरेशन थिएटर का टेक्नीशियन मौके से भाग निकला। क्लीनिक को सील कर दिया गया है।
कासिमपुर थाना क्षेत्र के मुसलमानाबाद निवासी मानसी ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी से शिकायत दर्ज कराई थी। बताया था कि उसके पति संजय कुमार (32) की तबीयत खराब थी। 29 सितंबर को उन्हें कछौना के फौजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि ऑपरेशन के बहाने संजय की किडनी निकाल ली गई। इसकी वजह से ऑपरेशन के 15 मिनट बाद संजय की मौत हो गई। मामले की जांच के लिए नोडल अधिकारी डॉ. मनोज कुमार सिंह टीम के साथ फौजी अस्पताल पहुंचे।
नोडल अधिकारी के मुताबिक अस्पताल का संचालन बिहार निवासी अरविंद पासवान कोई अभिलेख नहीं दिखा पाए। खुद की डिग्री भी नहीं दिखा पाए। यहां भर्ती मिले दो मरीजों को सीएचसी कछौना और संडीला भेजने की व्यवस्था की गई लेकिन दोनों मरीज अपने घर चले गए। नोडल अधिकारी ने बताया कि अरविंद पासवान को कछौना पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। अस्पताल को भी सील कर दिया गया है।
इसके बाद नोडल अधिकारी ने हथौड़ा रोड पर गयसिंहपुर स्थित एक क्लीनिक पर छापा मारा। नोडल अधिकारी के मुताबिक यहां डॉक्टर रंजीत कुमार सिंह क्लीनिक चलाते मिले। जांच में पता चला कि रंजीत के पास कोई डिग्री नहीं है। ओटी टेक्नीशियन का डिप्लोमा उसके पास है। गिरफ्तारी का अंदेशा होते ही रंजीत मौके से भाग गया। इस क्लीनिक को भी सील कर दिया गया। टीम को देखकर कुकुही में एक शख्स अपनी क्लीनिक बंद कर मौके से भाग गया।
छप्पर के नीचे कैंसर अस्पताल चलाता था अरविंद, फिर जगह बदलकर खोल लिया अस्पताल
कछौना में अस्पताल संचालक अरविंद पासवान पहली बार नहीं पकड़ा गया है। पूर्व में वह कटियामऊ के पास फौजी ढाबे के पड़ोस में फौजी अस्पताल चलाता था। यह अस्पताल छप्पर के नीचे संचालित था। यहां कैंसर के मरीज का इलाज हो रहा था।
अमर उजाला
में प्रकाशित खबर से इसका खुलासा हुआ था। तब अफसरों की टीम ने यहां छापा डालकर सब कुछ सील कर दिया था। पिछले कुछ माह से अरविंद पासवान ने फौजी अस्पताल के नाम से ही कछौना में दूसरी जगह पर अस्पताल संचालित करना शुरू कर दिया। अब यहां भी अस्पताल सील कर दिया गया है।
फोटो-23-कछौना में निजी अस्पताल के बाहर मौजूद मृतक के परिजन। संवाद