हरदोई। मंशा तो अच्छी थी, पर जिम्मेदारों की लापरवाही ने सब चौपट कर दिया। कहने को तो गरीब छात्राओं को शिक्षित करने के लिए कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों का संचालन कराया जा रहा है, पर विद्यालयों में छात्राओं के पढ़ने लिखने का ही सामान नहीं है। आवासीय विद्यालयों में किसी तरह खाना तो मिल रहा है, पर शिक्षण सामग्री के नाम पर एक कागज और पेंसिल तक नहीं है।
स्कूल खुले तीन माह होने को हैं, पर अभी तक स्कूलों में स्टेशनरी नहीं पहुंची है। सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत गरीब छात्राओं को आवासीय शिक्षा देने के लिए कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों का संचालन कराया जा रहा है। जिले के कई विकास खंडों में 20 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संचालित हैं और विद्यालयों में दो हजार छात्राओं को आवासीय शिक्षा देने की व्यवस्था है। छात्राओं को खाना कपड़ा से लेकर शिक्षण संबंधी सारी सामग्री निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है, पर जिले में जिम्मेदारों की लापरवाही से सब कुछ अव्यवस्था का शिकार है और दो हजार छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
अभी तक तो खाने पीने तक का कोई इंतजाम नहीं था, पर किसी तरह खाना आदि तो मिलने लगा, पर जिस उद्देश्य के लिए विद्यालय खोले गए, उसकी कोई व्यवस्था नहीं की गई। हालत यह है कि जुलाई से संचालित हो रहे विद्यालयों में अभी तक छात्राओं के लिए स्टेशनरी नहीं भेजी गई है। व्यवस्था के अनुसार एक विद्यालय में स्टेशनरी के लिए प्रति वर्ष 60 हजार रुपए दिए जाते हैं। इस हिसाब से एक छात्रा को कापी और पेंसिंल आदि के लिए 600 रुपए भेजे गए हैं। स्टेशनरी आपूर्ति का टेंडर भी डाला जा चुका है, पर जुलाई से शुरू विद्यालयों में सितंबर समाप्त होने को है, अभी तक स्टेशनरी नहीं भेजी गई है।
ऐसी हालत में छात्राओं को पढ़ने लिखने के लिए कापी और पेंसिल तक नहीं है। वार्डन और शिक्षकों का कहना है कि किसी तरह वह छात्राओं को पढ़ा रहे हैं। हालांकि, बीएसए मसीहुज्जमा सिद्दीकी का कहना है कि टेंडर हो चुके हैं। शीघ्र ही छात्राओें के लिए स्टेशनरी भी भिजवाई जा रही है।