हरदोई। विज्ञान से होने वाले लाभों के प्रति समाज में जागरूकता लाने और वैज्ञानिक सोच पैदा करने को 28 फरवरी को हर साल राष्ट्रीय वैज्ञानिक दिवस तो मनाया जाता है, पर ऐसा इस दिन के अलावा भी साल भर जिले में विज्ञान के प्रतिभावानों की खोज होती, पर अफसोस जिले को कोई बाल होनहार वैज्ञानिक नहीं मिल पा रहा है। भारत सरकार द्वारा जिले में संचालित इंस्पायर एवार्ड योजना में भी बीते चार सालों में लाखों खर्च हो गए, पर एक भी बाल वैज्ञानिक की खोज नहीं हो सकी।
भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा कक्षा 6, 7, 8 एवं कक्षा 9, 10 में अध्ययनरत छात्रों में विज्ञान विषय में अभिरुचि का संवर्धन करने के उद्देश्य से इंस्पायर अवार्ड योजना 2010 लागू की गई थी। जिसको यूपी में भी लागू किया गया है। प्रदेश में योजना का कार्यान्वयन भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद द्वारा किया जा रहा है, जिसको जिले में भी लागू किया गया है। योजना में हर वर्ग में एक-एक छात्र का चयन किया जाता है। निर्देशों में बताया गया कि स्कूल के प्राचार्य जिनके स्कूलों में इन वर्गों के छात्र अध्ययनरत हो से योजना में विचार रखने वाले कक्षा 6 से 10 तक के हर कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले छात्र को नामित करने के लिए निर्देशित किया गया है।
योजना में यह भी है कि इस प्रकार प्राप्त नामों से दोनों वर्गों में हश्र स्कूल में से एक-एक छात्र का चयन इंस्पायर एवार्ड सचिवालय द्वारा किया जाता है और उन्हें विज्ञान के किसी विषय पर एक माडल बनाकर प्रदर्शित करना होता है। योजना में हर स्कूल में दो वर्गों में से एक-एक चयनित छात्र-छात्रा को पांच हजार की राशि प्रदान की जाती है, जिसमें 25 सौ रुपये उनके द्वारा माडल बनाने पर और 2500 रुपये जिला स्तर पर उन्हें प्रदर्शनी में उपस्थित होकर प्रदर्शित करने में होने वाले व्यय के निमित्त होगी। प्रदर्शनी मुख्यालय या जनपद के किसी प्रमुख उपयुक्त स्थान पर आयोजित कराने के निर्देश है। जिला समन्वयक शैलेंद्र मिश्रा का इस बाबत कहना है कि ऐसा नहीं है, जिले में इस ओर कोई जागरूकता नहीं आई। योजना में कई सैकड़ा बच्चों ने अब तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।
जिलों से चयनित होने के बाद राज्य स्तर पर जिले का नाम रोशन किया है, पर राष्ट्रीय स्तर पर नहीं पहुंच पाए हैं, पर प्रयास जारी है। उधर, इंस्पायर अवार्ड योजना में वर्ष 10 से अब तक जिले के छह से आठ तक के वर्ग के 1288 छात्र-छात्राएं भाग्य आजमा चुके हैं, जिनमें कुछ का चयन राज्य स्तर तक हुआ है, पर राष्ट्रीय स्तर पर उनका चयन नहीं हो सका है। वर्ष 2010 में इस योजना के तहत जहां एक ओर जिले में 306 छात्र-छात्राओं का चयन किया गया था, वहीं 2011 में 26 छात्र-छात्राएं चयनित की गई, जबकि 2012 में 616 छात्र छात्राओं में बाल वैज्ञानिक खोजने का प्रयास किया गया। इसी तरह वर्ष 13 में 340 छात्र-छात्राएं अवार्ड को लेकर प्रथम स्तर पर चयनित हुए, पर अफसोस जिले का एक भी होनहार राष्ट्रीय स्तर पर नहीं निकल सका।
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प्रौद्योगिकी परिषद को भी गर्व है सतीश पर
हरदोई। जिले में ऐसे साइंस के महारथी भी हैं, जिनकी वैज्ञानिक बौद्धिक कौशल का लोहा न सिर्फ यहां के लोग मान चुके हैं, बल्कि प्रदेश व देश के विज्ञान के जानकार भी मानते हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद यूपी ने भी जिले के जीआईसी में विज्ञान टीचर के रूप में तैनात सतीश चंद्र यादव की क्षमता का लोहा माना है। परिषद ने विज्ञान को उकेरने को प्रदेश भर के 40 जिलों के जिन 200 टीचरों को चयनित किया, उनमें सतीश भी हैं। सतीश ने बताया कि विज्ञान टीचरों में संवर्धन क्षमता बढ़ाने को समय-समय पर टीचरों को प्रशिक्षित करने को प्रदेश भर के 200 टीचरों को चयनित किया गया है। परिषद का उद्देश्य विज्ञान टीचरों की अध्यापन कौशल का विकास करना, नई अध्यापन तकनीकियों से अवगत कराना, प्रदेश में विज्ञान शिक्षा के लिए रिसोर्स पर्सन का विकास करना, छात्रों को विज्ञान शिक्षण की नई अध्यापन तकनीकी से अवगत कराना आदि हैं, पर जिले में विज्ञान का विकास इसलिए भी ज्यादा नहीं हो पा रहा कि टीचरों के पास टीचिंग लर्निंग मैटेरियल की कमी है।
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इसलिए मनाया जाता विज्ञान दिवस
हरदोई। 28 फरवरी 28 को सर सीवी रमन ने अपनी खोज की घोषणा की थी। इसी खोज के लिए उन्हें 1930 में नोबेल पुरस्कार दिया गया था। इस दिवस को भारत में मनाने के पीछे उद्देश्य छात्रों को विज्ञान के प्रति आकर्षित व प्रेरित करना, जनसाधारण को विज्ञान व वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति सजग करना है। इस दिन विज्ञान संस्थाओं, स्कूल, कालेज आदि में कई प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।
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जिले में भी हुईं कई विज्ञान प्रतियोगिताएं
हरदोई। विज्ञान दिवस पर जिले के भी कई स्कूलों व कालेजों में बच्चों को न सिर्फ विज्ञान दिवस के बारे में जानकारी दी गई, बल्कि कई प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। आशा नगर स्थित जेडी पब्लिक स्कूल, कस्तूरबा बालिका स्कूल सुरसा, शाहाबाद आदि में विज्ञान प्रश्नोेत्तरी का आयोजन किया गया। जिसमें बालिकाओं ने विज्ञान कौशल का प्रदर्शन किया।
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कार्यशाला में टीचरों को पढ़ाए जाते पाठ
हरदोई। माध्यमिक स्कूलों में विज्ञान को बढ़ावा देने को विज्ञान टीचरों की कार्यशालाएं आयोजित की जाती रही हैं, जिसमें विज्ञान के बाबत जानकारी दी जाती है, जिसमें भी बजट का भरपूर प्रबंध है, पर यह टीचर किस तरह से स्कूलों में बच्चों को विज्ञान के गुर सिखा रहे हैं उसका नतीजा प्राइमरी व जूनियर स्कूलों के बच्चों के रूप में सामने हैं। अभी हाल में ही जीआईसी में टीचरों को प्रशिक्षण दिया गया और कार्यशाला के नाम पर यहां पर भी बजट की इतिश्री की गई।
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छात्र-छात्राओं को वास्तविक विज्ञान की तलाश---
प्राथमिक विद्यालय-2842, जूनियर हाई स्कूल-1029, एडेड इंटर कालेज-71, जीआईसी-23, एडेड जूनियर हाई स्कूल-44, मान्यता प्राप्त प्राथमिक व जूनियर स्कूल-2142, वित्त विहीन मान्यता प्राप्त इंटर कालेज-373, कस्तूरबा गांधी स्कूल-20, प्राथमिक छात्र-4,15,695, जूनियर छात्र-1,77,171, हाईस्कूल छात्र-92,234, इंटर छात्र-68,918, परिषदीय प्राथमिक टीचर-3,320, परिषदीय शिक्षामित्र-4,411,परिषदीय जूनियर टीचर-1848