बिलग्राम। कामयाबी का रास्ता सूफी संतों की बताई हुई बाताें पर अमल करने से मिलता है। उर्स तैयबी वाहिदी में दूर दराज से आए उलेमाओं व सज्जादा नशीन ने तकरीर पेश की। तीन दिवसीय उर्स कुल शरीफ के साथ संपन्न हुआ। जिसमें हजारों अकीदतमंदों में भाग लिया।
सुल्हाड़ा स्थित खानकाहे वाहिदिया तैयबिया में आयोजित तीन दिवसीय उर्स के दौरान बुधवार की रात जलसे में मौलाना मुफ्ती हनीफ बरकाती ने कहा कि जब तक दुनिया चलेगी, तब तक सूफी सैयद मीर अब्दुल वाहिद बिलग्रामी व सैयद मीर तैयब जैसे अल्लाह के नेक बंदों को याद किया जाएगा। जिन्होंने इंसानियत व इसलाम के बेहतर पैगाम दुनिया वालों को दिए। नायब सज्जादा नशीन मौलाना सैयद सुहेल मियां ने कहा कि इसलाम में जाति पात का कोई भी रिवाज नहीं है। कामयाब लोग वहीं है जो शरीयत पर और पैगंबर मोहम्मद साहब की बताई गई सबसे अहम इबादत नमाज को पाबंदी से अदा करते है।
उन्होंने कहा कि आलोचना, बुराई से लोगों को बचकर रहना चाहिए। सज्जादा नशीन सैयद मीर मोहम्मद ताहिर ने कहा कि बेहतर अमल से ही इंसान ईमान वाला बनता है। इस मौके पर मुफ्ती आलम रजा नूरी कानपुर, मौलाना लियाकत नेपाली, कारी राशिद संभली, मुफ्ती हनीफ बरकाती कानपुर, मौलाना रफीक वाहिदी दिल्ली, मौलाना सलीमुल कादिरी मुंबई, मौलाना नदीम, कारी अबुल हसन, शायर इस्लाम मैशर बेरलवी, शाहिद बनारसी, सैफ रजा खान क ानपुरी आदि ने बुजुर्गों की शान में बयान व नात पेश की।