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10 करोड़ का असलहा बाजार

Tue, 22 Oct 2013 05:41 AM IST
Hardoi
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हरदोई। जिले में बढ़ती असलहा लाइसेंस की चाहत के बीच असलहा बाजार भी खूब उछाल मार रहा है। शस्त्र विभाग के आंकड़ों पर गौर करें, तो जहां असलहे की चाहत में लाइसेंस के लिए हजारों आवेदन पत्र लंबित हैं, तो वहीं पिछले 19 माह में असलहा बिक्री का कारोबार 10 करोड़ तक पहुंच गया है।
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इस अवधि में करीब 1233 लाइसेंस स्वीकृत हुए हैं, जिसमें करीब 5 फीसदी लाइसेंस विरासत संबंधी भी है। असलहों की कीमत करीब 10 करोड़ पहुंच रही है। यह कारोबार तो सिर्फ वैपन की कीमत का आधार और अनुमान है, जबकि यहां संचालित करीब 37 गन हाउसों का कारतूस बिक्री का कारोबार भी करोड़ों में है। जिस तरह से शस्त्र बढ़ रहे, उसी तरह से कारतूस बिक्री का भी कारोबार बढ़ रहा है। असलहों का बाजार गर्म होने के साथ ही लोगों के लिए कमाई का जरिया भी बनता जा रहा है। असलहों को लेकर लोगों के बीच इंडियन कंपनियों के असलहों के साथ ही विलायती कंपनियों के असलहे भी पसंद बनते जा रहे है।
जिले में सबसे ज्यादा डिमांड राइफलों, रिवाल्वर और पिस्टल की है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, 40 लाख आबादी वाले इस जिले में करीब 30 हजार शस्त्र लाइसेंस है और 12 हजार से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस निस्तारण होने की राह देख रहे हैं। इनमें से काफी संख्या में तो आवेदन पत्र ऐसे है, जिनकी रिपोर्ट की समयावधि निकल चुकी है। इस समय शस्त्र लाइसेंस नहीं हो रहे और पहले से ही आवेदन पत्रों की लंबी लाइन है। इसके बाद भी लाइसेंस पाने की हसरत कम नहीं हो रही और लोग पुन: रिपोर्ट लगवाने के साथ ही आवेदन भी कर रहे हैं।
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उधर, वर्ष 2000 से अभी तक करीब 14,199 शस्त्र लाइसेंस जारी हुए है। जिनमें विरासत के मामलोें के अलावा ट्रांसफर के मामले भी शामिल है। जिले में हर साल एक हजार से 11 सौ के औसत से लाइसेंस बढ़ जाते हैं, जबकि आवेदन हर साल करीब दो से तीन हजार आवेदन नए पुराने हो जाते हैं। उधर, इकनाली बंदूक 81 जारी हुए, जिनकी कीमत 10 लाख रुपये, जबकि दुनाली बंदूक 99 जारी हुए, जिनकी कीमत 25 लाख, राइफल के लाइसेंस 704 जारी हुए, जिनकी कीमत पांच करोड़ रुपये है। रिवाल्वर और पिस्टल के 449 लाइसेंस जारी हुए, जिनकी कीमत पांच करोड़ रुपये है।
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‘यह सही है कि वर्ष 2000 से अभी तक करीब 14 हजार लाइसेंस जारी हुए हैं और जिले में लाइसेंस धारकों की संख्या तीस हजार के करीब है। इसके बाद भी आवेदन पत्र काफी संख्या में आ रहे है।’ डा. अशोक शुक्ला, प्रभारी अधिकारी शस्त्र
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