फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब धान की रोपाई की कवायद

Sat, 29 Jun 2013 05:30 AM IST
Hardoi
विज्ञापन
विज्ञापन
हरदोई। मौसम के मिजाज खेती किसानी के लिए अनुकूल हो गए हैं। धान की फसल के लिए बारिश का आगाज काफी हो रहा है। बुधवार की रात और गुरुवार सुबह हुई करीब 50 मिमी. बारिश सहित जून में अब तक करीब 175 मिमी. बारिश हो चुकी है, जिससे अब किसानों ने धान की रोपाई करने की तैयारियां शुरू कर दी है।
विज्ञापन

जिले में प्रमुख रूप से गन्ना, गेहूं एवं धान की खेती होती है। पिछले साल की तरह अबकी भी करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल करने की तैयारियां हो रही हैं। धान की रोपाई का कार्य जुलाई के प्रथम सप्ताह से शुरू हो जाता है। इसके लिए किसानों द्वारा जून में धान की बेड तैयार कर लेते हैं। वैसे तो धान की वैरायटी में बासमती चावल यहां नहीं होता और किसानों द्वारा मोटा एवं सामान्य महीन किस्म की क्वालिटी वाले चावल के धान की खेती करते हैं। उप कृषि निदेशक वीके तिवारी के अनुसार बीस से 25 दिनों के भीतर धान की बेड तैयार हो जाती है और उसके बाद किसानों द्वारा जुलाई में धान की रोपाई की जाती है।
उन्होंने बताया कि पिछले साल मानसून देर से आया था और बारिश भी कम हुई थी, जिससे धान की बेड तैयार करने से लेकर रोपाई में विलंब होने के साथ उत्पादन पर असर पड़ा था। इस साल बारिश और मानसून का आगाज अभी तक ठीक है। जून में अब तक करीब 175 मिमी. बारिश हो चुकी है। अभी रोपाई शुरू होने में एक सप्ताह का समय है ऐसे में और बारिश होने की संभावनाओं के बीच धान के लिए बारिश काफी अच्छी रहेगी। उन्होंने बताया कि श्री पद्धति से धान की खेती में सिंचाई को पानी की जरूरत कम होती है, ऐसे में जिन क्षेत्रों में पानी की समस्या रहती है या फिर बारिश कम होती है, वहां श्री पद्धति से धान की खेती की जा सकती है।
विज्ञापन

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार, श्री पद्धति से धान की खेती करना काफी लाभप्रद है, इससे जहां धान के लिए पानी की जरूरत कम होती है वहीं उत्पादन बढ़ने की संभावनाएं रहती है। श्री पद्धति से धान की खेती करने के लिए किसानों को धान की बुवाई करने से पहले बीज को 24 घंटे पहले भिगोना पड़ता है और जब वह अंकुरित होने लगे तो उसे खेत में बो देना चाहिए। 12 से 15 दिनों में नर्सरी तैयार हो जाती है। नर्सरी तैयार होने के बाद देर शाम के समय नर्सरी की रोपाई करनी चाहिए। धान की पौध की रोपाई एक-एक मीटर की दूरी पर करनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें