नघेटा रोड स्थित बाल विद्या भवन परिसर में आध्यात्मिक होली महोत्सव समिति की ओर से चल रहे आध्यात्मिक होली महोत्सव का मंगलवार को समापन हो गया। इसमें गुरु किरीट महाराज ने कहा कि भक्ति का अर्थ प्रभु की विरह है यानी प्रभु की याद में रोना ही असली भक्ति है।
उन्होंने कहा कि कलयुग में केवल कीर्तन ही एक मात्र ऐसा साधन है, जिससे जीव की मुक्ति हो जाती है। भक्ति में आनंद है और मोक्ष की भी प्राप्ति होती है।
कर्म, भक्ति और ज्ञान तीनों की आवश्यकताएं मानव जीवन में पड़ती है। इन तीनों को प्राप्त करने के लिए कोई उम्र की सीमा नहीं होती है। उन्होंने कहा कि जीव की पुष्टि प्रेम से होती है भोजन से नहीं होती।
भगवान श्रीकृष्ण प्रेमावतार हैं जो कर्म योगी हैं वो चक्र को उठाता है। उन्होंने कहा कि प्रेमावतार में प्रभु बांसुरी बजाते हैं। गोपी के जीवन में प्रतिदिन होली है। आत्मा को सत्य और शांति के सिवा कुछ नहीं भाता।
रंग भरी जिंदगी में नित्य होली है इसलिए नित्य प्रेम और आनंद में डूबे रहिए। राधा कृष्ण की सुंदर झांकी ने फूलों की वर्षा की।
होली के भजनों पर भक्तों ने खूब नृत्य किया। इस दौरान कान्हा पिचकारी न मार...भजन पर फूलों की होली
खेलते हुए कलाकार व भक्तगण झूमते नजर आए।
आचार्य संतोष भाई ने बताया कि मुख्य रूप से आलोक कपूर, अतुल कपूर ने व्यास पीठ का पूजन किया। इस अंतिम दिन प्रमुख रूप से मुकेश अग्रवाल, सजीव अग्रवाल, राजेंद्र पटेल, गिरीश डिडवानिया, नरेश गोयल, अपूर्व माहेश्वरी, अनूप पुरी, प्रभाकर पांडेय, शेखर रस्तोगी, कीर्ति सिंह, हरिवंश सिंह, अवध बिहारी मिश्रा आदि मौजूद रहे। ब्यूरो
प्रभु की याद में रोना ही असली भक्ति
फॉग होली के साथ आध्यात्मिक होली महोत्सव का समापन, किरीट महाराज ने दिए प्रवचन