हरदोई। शरीर में खून की कमी होने से महिलाएं कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाती हैं। प्रसव के दौरान खून की कमी होने पर प्रसूता की मौत भी हो जाती है। खान-पान में लापरवाही और पौष्टिक आहार में कमी की वजह से गर्भवतियाें में खून की कमी होने लगती है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में 57 हजार गर्भवती महिलाओं की जांच में 21,044 महिलाओं में खून की कमी पाई गई है।
एनीमिया (रक्ताल्पता) एक गंभीर समस्या है। जिले में किशोरियां, गर्भवतियों से लेकर सामान्य महिलाएं तक इसकी चपेट में हैं। पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पताल में रोजाना आने वाली महिलाओं में करीब 45 फीसदी महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त रहती हैं। यह आलम तब है जब एनीमिया के रोकथाम के लिए तमाम योजनाएं संचालित हैं। जिले में दिसंबर माह तक करीब 57,961 गर्भवतियों का पंजीकरण हो चुका है।
हर माह 4000 से 4300 गर्भवतियों की हीमोग्लोबिन की जांच भी होती है। इसमें 21,044 महिलाओं में 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर से भी कम खून मिला। वहीं, 896 महिलाओं में आठ डेसीलीटर खून पाया गया। विशेषज्ञ के मुताबिक, गर्भवती महिलाओं के शरीर में औसतन 12 से 14 ग्राम खून होना चाहिए।
प्रसव के दौरान जान जोखिम में डालती है एनीमिया
जिला महिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. बुशरा बहार ने बताया कि खून की कमी गर्भवती के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी नुकसानदेह है। गर्भधारण की जानकारी होते ही चिकित्सीय सलाह के साथ खून की जांच करानी चाहिए। हरी सब्जी, फल, गुड़, चना, पालक, मेथी और आयरन की दवा खाना चाहिए। एनीमिया होने पर थकान, सांस फूलना आदि समस्याओं के साथ बर्फ खाने का मन होता है। आयरन की कमी को दवाओं से पूरा किया जा सकता है और आयरन की दवा बिना दूध व चाय से खानी चाहिए। दवा खाने के एक घंटे बाद ही कैल्शियम की दवा लेनी चाहिए। आयरन की दवा प्रसव के छह माह बाद तक खानी चाहिए।
डॉ. अल्फिशा हुसैन ने बताया कि बदलती जीवनशैली के साथ आहार संबंधी आदतों में होने वाले बदलाव से महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त हो रही हैं। मां के स्वस्थ होने से गर्भस्थ शिशु भी तंदुरुस्त होगा। रक्त की कमी से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है।
हर माह बढ़ रही गर्भवतियों में एनीमिया
गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराने के लिए संचालित तमाम योजनाएं संचालित होती है। जननी सुरक्षा योजना के तहत महिला को गर्भधारण से प्रसव होने तक छह हजार रुपये और राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत संतुलित पोषण आहार भी दिया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में हर माह जांच शिविर भी लगाए जा रहे हैं। फिर भी महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक गंभीर एनीमिया से जुलाई में 46, अगस्त में 98, सितंबर में 119, अक्तूबर में 135, नवंबर में 115 और दिसंबर में 120 महिलाएं चिह्नित की गई हैं।