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‘38’ के डंक से स्टेडियम हुंआ बेदम

Sun, 08 Mar 2015 11:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
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जिले का स्पोर्ट्स स्टेडियम एक बार फिर से अनदेखी का शिकार होता जा रहा है। शासन व प्रशासन की इस ओर नजर न पड़ पाने से जहां मूलभूत आवश्यकताआें के लिए स्टेडियम तरसता नजर आ रहा, वहीं बजट के अभाव में एक बार फिर बारिश के दिनों में तालाब बना नजर आएगा।
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सूत्रों की माने तो दो साल पहले खेल मंत्री के के आश्वासन के बाद भी नाला निर्माण के 38 लाख का प्रोजेक्ट अब तक पास नहीं हो सका है। इस बाबत खेल अधिकारी का कहना है कि उनके अब तक के प्रयास पूरी तरह से विफल ही रहे हैं।
बहरहाल अनदेखी के चलते जिले का खेल प्रभावित होता नजर आ रहा और खेल प्रतिभाओं को बाहरी जिलों की दौड़ लगाने को विवश होना पड़ रहा है। ज्ञात हो कि दो वर्ष पूर्व जनपद आगमन पर खेल मंत्री रामकरन आर्य ने सीतापुर रोड स्थित स्पोर्ट्स स्टेडियम का बारीकी से निरीक्षण किया था।
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इस दौरान यहां के संबंधित स्पोर्ट्स अफसर एवं अन्य मौजूद खिलाड़ियों ने स्टेडियम के संबंध में अपने अपने सुझाव रखे थे तथा उनको पूरा करने की मांग खेल मंत्री से की थी। उनके समक्ष ग्राउंड में बारिश के दिनों में पानी भरे ही रहने की बात बताई गई थी, जिससे प्रतियोगिताओं के आयोजन धरे के धरे रहने की बात भी उनके समक्ष लाई गई थी।

इसके बाद उनके द्वारा न सिर्फ इस संबंध में आश्वासन दिया गया, बल्कि निदेशालय पहुंचने के बाद इस पर स्वीकृति दिलाने का भी पूर्ण आश्वासन दिया गया था। कुल मिलाकर जिले के स्पोर्ट्स स्टेडियम में 38 लाख के प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिलने की सूचना दी गई थी।

जिसके तहत स्पोर्ट्स स्टेडियम के किनारे किनारे तीन मीटर के एक नाले का निर्माण कराया जाना था, जिससे बारिश का पानी भी ग्राउंड पर न ठहरने और खेल में किसी भी तरह की कोई रुकावट न आने की बात बताई गई थी, पर तब से लेकर अब तक दो साल बीत गए न तो कोई बजट ही रिलीज हुआ और न ही कोई आश्वासन ही दिया गया।

जिसके बाद एक बार फिर से बारिश के सीजन में स्पोर्ट्स स्टेडियम का ग्राउंड तालाब में नजर आने की पूर्ण संभावना जता दी गई है। इस बाबत जिला क्रीड़ाधिकारी अनिमेष सक्सेना ने बताया कि स्टेडियम ग्राउंड के किनारे-किनारे तीन मीटर का नाला बनना था, जिसको लेकर स्वयं खेल मंत्री ने 38 लाख का प्रोजेक्ट स्वीकृत कराए जाने की बात कही थी।

पर तब से लेकर अब तक कई बार मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई आश्वासन नहीं मिला है। अब तो धीमे धीमे इस ओर उम्मीद भी कम होती जा रही है। उन्होंने बताया कि स्टेडियम में बैडमिंटन हाल के सिंथेटिक कोड एवं माडर्न मल्टी जिम का पुरसाहाल लिए जाने की भी सख्त जरूरत है।
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