मनरेगा के जाबकार्ड धारकों को जहां एक ओर काम नहीं
मिल रहा, वहीं दूसरी ओर कुछ विकास खंडों की ऐसी भी ग्राम पंचायतें हैं,
जिनमें जाबकार्ड धारकों ने सौ भी ज्यादा दिन का काम किया है। चूंकि मनरेगा
जाब कार्डधारकों को सिर्फ सौ दिन का काम ही देने का नियम है, ऐसे में जहां
अधिक दिन का काम दिया गया, वहां मनरेगा राशि में सेंध ही लगी है।
जिसकी
वसूली के निर्देश जारी कर दिए गए। सीडीओ ने संबंधित बीडीओ को वसूली कर
जमा करने के आदेश दिए। ज्ञात होे कि मनरेगा के नियमों के अंतर्गत एक जाब
कार्डधारक को सौ दिन का काम देने का प्रावधान है, पर जिले में मनरेगा के
नियमाें की अनदेखी की गई है।
1101 ग्राम पंचायतों में से कुछ ग्राम
पंचायतें तो ऐसी हैं, जहां कार्डधारकों को सौ दिन का काम नहीं मिला है और
कुछ जाबकार्डधारक ऐसे भी जिन्होंने सौ से अधिक दिन का काम कर डाला है। जिले
के 19 विकास खंडों में से मल्लावां और शाहाबाद में तो किसी जाब कार्डधारक
को सौ दिन से अधिक का काम नहीं दिया गया।
पर अन्य 17 विकास खंडों में कुल
287 परिवार हैं, जिन्होंने सौ से दिन दिन का काम कर कुल 2718 मानव दिवसों
को सृजित किया। इससे मनरेगा की कुल 4,24,008 रुपये की धनराशि मजदूरों को
अतिरिक्त दी गई। चूंकि सौ दिन से ज्यादा काम देना मनरेगा प्रावधानों में
शामिल नहीं है, ऐसे में अब मजदूरी को दी गई राशि की रिकवरी कराई जाएगी।
जिसको लेकर सीडीओ ने बीडीओ को मजदूरों से रिकवरी के निर्देश दिए है। उधर,
कार्डधारकों को सौ दिन से अधिक दिन का काम देने वाले 17 विकास खंडों के
बीडीओ से स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं। वैसे तो ग्राम पंचायतों
में मजदूरों को काम देने का उत्तरदायित्व तो ग्राम स्तरीय अफसरों का है, पर
फीडिंग तो विकास खंड स्तर से कराई जाती है, ऐसे में सीडीओ ने बीडीओ को
उत्तरदायित्वों से स्पष्टीकरण लेकर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।