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2 अरब 27 करोड़ के जख्म पर 66 करोड़ का मरहम !

Tue, 29 Dec 2015 12:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरदोई।
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वर्ष 2016 कृषि क्षेत्र के लिए कैसा रहेेगा, किसानों के लिए मरहम बनेगा या फिर जख्मों तो ताजा रखेगा यह तो समय बताएगा पर वर्ष 2015 किसानों के  लिए आंसुओं से डूबी कहानी भर कहकर विदा हो रहा है। पूरे साल जिले के किसान प्राकृतिक आपदाओं से मिले जख्मों से कराहते रहे । विभिन्न कारणों से 24 से अधिक किसान फसली नुकसान के सदमे या फिर किसी अन्य कारण से दुनिया से विदा हो गए। जिलाधिकारी रमेश मिश्रा कहते है कि जो भी सरकारी सहायता आई उसका वितरण कराया गया है। किसानों की सहायता के लिए हर संभव मदद की जाती रही है। कहीं कोई गड़बड़ी हुई हो तो अवगत कराए कार्रवाई होगी।
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कृषि क्षेत्र में बरबादी का था वर्ष 2015 का आगाज  
वैसे तो वर्ष 2014 में भी सूखे की मार से किसान आर्थिक संकटों एवं कर्ज के जख्मों से कराह रहे थे मगर वर्ष 2015 का आगाज कृषि की बरबादी के लिए जाना गया । अतिवृष्टि ने किसानों की रबी की फसलों को बर्बाद कर दिया । फसलों की बर्बादी के आंकड़े 10 से 100 प्रतिशत रहे । कहीं कम नुकसान हुआ था तो कहीं 100 प्रतिशत नुकसान हुआ था । प्रशासन के सर्वे को ही आधार माने तो 5 लाख से अधिक किसान फसली नुकसान से प्रभावित हुए थे और तकरीबन 2 अरब 27 करोड़ का नुकसान हुआ। इसके बाद खरीफ की फसलों में भी माह बार अगर बारिश पर नजर डाली जाए तो कभी बारिश ज्यादा हुई तो कभी लिहाजा खरीफ की फसलें भी 20 से 50 फीसदी प्रभावित हुई हालांकि 50 फीसदी का औसत न मिलने से सूखाग्र्रस्त जिला घोषित न हो सका । उधर गन्ना किसान पूरे साल भुगतान के लिए जूझते रहे । अभी भी एक चीनी मिल पर गन्ना मूल्य बकाया है।

इस तरह से लग रहा है जख्मों पर मरहम  
वर्ष 2015 में  फसली नुकसान मुआवजा के तौर पर रबी की फसलों के लिए जिला प्रशासन द्वारा करीब 5 लाख 26 हजार 992 किसानों के लिए  करीब 2 अरब 27 करोड़ 68 लाख 29 हजार की डिमांड शासन से की थी । जिसके सापेक्ष जिले को 66 करोड़ 35 लाख की धनराशि मिली। जिसका वितरण  करीब 2 लाख 25 हजार किसानों के बीच किए जाने की बात कही जा रही है। यह आंकड़े कितने सही है और वास्तव में कितने किसानों तक मुआवजा मिला यह बात तो तहसील प्रशासन के बैंक अकाउंटों से कैश हो चुकी धनराशि किसानों की सूची के मिलान से ही हो सकती है मगर इन आंकड़ों पर भी भरोसा करे तो अभी भी 3 लाख से अधिक किसानों को मरहम के नाम पर कुछ नहीं मिला है।
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सदर तहसील क्षेत्र में हुआ था सर्वाधिक नुकसान
जिले में पांच तहसीले हैं । जिसमें हरदोई सदर, सवायजपुर, शाहाबाद, संडीला तथा बिलग्राम है। प्रशासन की सर्वे एवं मुआवजा डिमांड पर नजर डाले तो जिले के कुल आंकलित एवं डिमांड मुआवजा राशि लगभग 2 अरब 27 करोड 68 लाख 29 हजार में 1 अरब 25 करोड़ की डिमांड सदर तहसील की थी । सदर तहसील में प्रभावित होने वाले किसानों की संख्या करीब 1 लाख 53 हजार है और बंटने वाली राशि 20 करोड़ से लगभग 55 हजार किसानों के फसली नुकसान के जख्मों पर मरहम लगा है।

अभी तो छोटे मझोलों को ही मरहम
जिले में अभी तक मिले लगभग 66 करोड़ 35 लाख की इमदाद रूपी मरहम में 62 करोड 35 लाख का वितरण हो चुका है और 4 करोड़ बांटने की तैयारी है मगर इस वितरण में अभी छोटे मंझोले गरीब लोगों को ही सहायता देने की बात कही जा रही है जब कि हकीकत इससे उलट है।


जिले के प्रगतिशील किसान से दिल्ली में वरिष्ठ पत्रकार तक का सफर तय करने वाले कृषि क्षेत्र की सहकारी संस्था नेफेड के निदेशक दीपक द्विवेदी ने कहा कि जब तक कृषि क्षेत्र को उद्योग एवं कारोबार की तरह दर्जा देकर किसानों को रियायतें एवं सहुलियतें नहीं दी जाएगी व प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्थाएं नहीं होगी तब तक शत प्रतिशत किसानों के बीच खुशहाली नहीं आएगी। किसानों की खुशहाली के बिना देश का संपूर्ण विकास संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि कुछ समय पूर्व न्यूयार्क में हुए 150 देशों के विकास संबंधी सम्मेलन में उन्होंने कहा था गांव और किसानों की प्र्रगति की बात भारत की ओर से उठाते हुए सुझाव दिए थे। उन्होंने कहा कि अपने गांव की खेती करने के अनुभव और कठिनाइयों को भी शेयर किया जो कि आम किसान उठाता है।

प्रगतिशील किसान अभय शंकर गौड कहते है कि विश्व में गन्ना उत्पादन के मामले में आस्ट्रेलिया प्रथम तथा भारत द्वितीय स्थान पर है जब कि क्षेत्रफल में भारत आस्ट्रेलिया आगे है। आस्ट्रेलिया में गन्ना उत्पादन एवं रिकवरी भारत की अपेक्षा इस लिए ज्यादा अच्छी है कि वहां पर किसानों को मशीनरी सपोर्ट है जब कि भारत में गन्ना किसान अपनी ही फसल को बेंचने से लेेकर भुगतान पाने के लिए संकट झेलता है। सरकार को इस ओर आस्ट्रेलिया के तर्ज पर किसानों को सहुलियतें प्रदान करानी चाहिए ।
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