हरदोई। भारतीय जनता पार्टी ने हरदोई और मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र से मौजूदा सांसदों के टिकट काट दिए हैं। सदर लोकसभा क्षेत्र से पूर्व सांसद जय प्रकाश और मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र से पूर्व सांसद अशोक रावत को पार्टी ने प्रत्याशी घोषित किया है। शुक्रवार देर शाम प्रत्याशियों की घोषणा होने पर मौजूदा सांसदों के समर्थकों में निराशा छा गई, जबकि टिकट पाने वाले जय प्रकाश और अशोक रावत के समर्थकों में खुशी के रंग बिखर गए।
हरदोई लोकसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए सुरिक्षत है। वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा ने अंशुल वर्मा को प्रत्याशी बनाया था। मोदी लहर पर सवार अंशुल ने हरदोई सीट से भाजपा की जीत का दस वर्ष का सूखा खत्म कर 90 हजार वोटों से जीत पाई थी। इस बार भी वह टिकट के मजबूत दावेदार थे, लेकिन वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद दोबारा भाजपाई हुए जय प्रकाश रावत अंशुल वर्मा पर भारी पड़े। गुरुवार रात घोषित की गई प्रत्याशियों की सूची में अंशुल वर्मा का नाम नहीं है, जबकि हरदोई सीट से जय प्रकाश को प्रत्याशी घोषित किया गया है। इसी तरह मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र से वर्ष 2014 में भाजपा ने अंजू बाला को प्रत्याशी घोषित किया था। मोदी लहर में वह भी जीत कर दिल्ली पहुंची थी। भाजपा ने इस चुनाव में उनका टिकट काट दिया है और बसपा से आए अशोक रावत को प्रत्याशी बनाया है।
हरदोई संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी घोषित किए गए जय प्रकाश रावत मूल रूप से उन्नाव जनपद के सफीपुर विकास खंड के ग्राम मुंडा के निवासी हैं। जय प्रकाश ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1991 में भाजपा से ही की थी। तब वह पहली बार भाजपा के टिकट पर हरदोई से चुनाव लड़े थे और जीतकर दिल्ली पहुंचे थे। 1996 में दोबारा भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते लेकिन 1998 के चुनाव में वह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने पर भी सपा प्रत्याशी ऊषा वर्मा से हार गए थे। 1999 का चुनाव उन्होंने लोकतांत्रिक कांग्रेस के टिकट पर हरदोई सीट से लड़ा था, तब भाजपा और लोकतांत्रिक कांग्रेस का गठबंधन था। उस चुनाव में नरेश अग्रवाल की बदौलत जय प्रकाश सांसद बनने में सफल रहे थे। वर्ष 2004 में उन्होंने सपा के टिकट पर मोहनलालगंज से चुनाव लड़ा और जीत गए। 2009 का चुनाव भी जय प्रकाश ने बसपा के टिकट पर मोहनलालगंज से लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद उन्हें बसपा ने राज्य सभा भी भेजा। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में जय प्रकाश सपा प्रत्याशी के रूप में मिश्रिख सीट से चुनाव लड़े थे, लेकिन भाजपा प्रत्याशी अंजू बाला के मुकाबले तीसरे स्थान पर रहे थेे। जय प्रकाश की पत्नी ज्योती रावत दो बार उन्नाव की जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।
मिश्रिख से भाजपा प्रत्याशी घोषित किए गए अशोक रावत दो बार इसी क्षेत्र से सांसद रह चुके हैं। वर्ष 2004 और वर्ष 2009 में बसपा के टिकट पर अशोक रावत सांसद चुने गए थे। वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव भी उन्होंने बसपा के टिकट पर लड़ा था, लेकिन भाजपा प्रत्याशी अंजू बाला से हार गए थे। अशोक रावत के चाचा पूर्व मंत्री रामपाल वर्मा इन दिनों बालामऊ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक हैं, तो चचेरे भाई प्रभाष कुमार सांडी सीट से भाजपा के विधायक हैं। अशोक रावत वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद वर्ष 2018 में भाजपा में शामिल हुए थे।
मिश्रिख संसदीय क्षेत्र में कुर्मी मतदाताओं की संख्या बहुत अधिक है। कुर्मी मतदाता ही इस क्षेत्र से चुनाव का रुख तय करते हैं। अंजू बाला के पति सतीश वर्मा कुर्मी बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में सतीश वर्मा ने भाजपा से बिलग्राम-मल्लावंा क्षेत्र से टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी ने टिकट नहीं दिया था। तत्कालीन विधायक बृजेश वर्मा बसपा छोड़कर भाजपा में आए थे, लेकिन तब भी उन्हें टिकट नहीं मिला था। भाजपा ने अपने कैडर के कार्यकर्ता कुर्मी बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले आशीष सिंह आशू को प्रत्याशी बनाया था और वह जीतकर विधायक भी बने। अब अंजू बाला का टिकट कटने से कहीं न कहीं कुर्मी बिरादरी के मतदाताओं में नाराजगी है, जो सोशल मीडिया पर झलक भी रही है।
1999 के बाद अब एक बार फिर भाजपा प्रत्याशी के रूप में जय प्रकाश और सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी के रूप में ऊषा वर्मा आमने-सामने होंगी। 1999 में लोकतांत्रिक कांग्रेस और भाजपा गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में जय प्रकाश का मुकाबला सपा प्रत्याशी ऊषा वर्मा से हुआ था। तब ऊषा वर्मा हार गई थीं। इस बार सपा-बसपा गठबंधन की प्रत्याशी ऊषा वर्मा हैं और उनके सामने बीस साल बाद फिर भाजपा के टिकट पर जय प्रकाश हैं।