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साठ लाख रुपये से होगी शहर के आठ नालों की सफाई

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हरदोई। बरसात में शहर को जलभराव की समस्या से बचाने की कवायद नगर पालिका परिषद ने शुरू कर दी है। साठ लाख रुपये खर्च कर शहर के आठ बड़े नालों की सफाई का अभियान मंगलवार से शुरू होगा। छोटी नालियों की सफाई सोमवार से ही शुरू हो गई। पालिका के अधिशासी अधिकारी जी लाल ने इस संदर्भ में कार्यालय कक्ष में सफाई नायकों के साथ बैठक भी की। उन्होंने सफाई कार्य गंभीरता से करने के निर्देश दिए। कहा कि लापरवाही मिली तो कार्रवाई होगी।
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शहर में आठ बड़े नाले हैं। इन नालों की सफाई समय से न होने पर शहर में अलग-अलग स्थानों पर जलभराव की समस्या होती है। जून की शुरुआत होने पर भी शहर में नालों की सफाई का अभियान शुरू न होने पर अमर उजाला ने प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। इसको संज्ञान में लेकर नगर पालिकाध्यक्ष सुख सागर मिश्र मधुर ने जल्द ही सफाई अभियान शुरू कराने के निर्देश संबंधित कर्मचारियों को दिए थे। उधर दूसरी ओर डीएम पुलकित खरे ने भी मानसूनी बारिश से पहले ही नालों की सफाई कराने के निर्देश सभी अधिशासी अधिकारियों को दिए थे। इसके बाद नाला सफाई के लिए कवायद शुरू कर दी गई। नगर पालिकाध्यक्ष सुख सागर मिश्र मधुर ने बताया कि निविदा की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। मंगलवार से वृहद स्तर पर नालों की सफाई शुरू हो जाएगी। आठ बड़े नालों की सफाई पर साठ लाख रुपये खर्च होंगे।

पॉलिथीन का इस्तेमाल न करें शहरी
नगर पालिकाध्यक्ष सुख सागर मिश्र मधुर ने शहरवासियों से अपील की है कि पॉलिथीन का इस्तेमाल न करें। उन्होंने कहा कि शासन स्तर से पॉलिथीन का उपयोग बंद करने के निर्देश हैं। शहरवासी थोड़ी जागरुकता दिखाएं और इसका प्रयोग न करें। पॉलिथीन के कारण ही अधिकतर नाले और नालियां चोक हो रही हैं।
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सफाई हो तो सिल्ट भी उठाएं
चांद मियां का कहना है कि नालों की सफाई बेहद जरूरी है। साथ ही यह भी आवश्यक है कि नालों से निकलने वाली सिल्ट को भी चौबीस घंटे के अंदर उठवाया जाए। सिल्ट कई दिन तक पड़े रहने पर यह फिर से नाले में चली जाती है।

मई के आखिरी में ही होनी चाहिए थी सफाई
जोगेंदर सिंह कहते हैं कि नालों की सफाई तो मई के आखिरी में ही हो जानी चाहिए थी। अब हो रही है, तो अच्छी बात है, लेकिन नालों की सफाई में औपचारिकता न निभाएं। सही ढंग से सफाई नहीं हुई तो भी जलभराव की समस्या रहेगी।


सफाई के नाम पर औपचारिकता न निभाएं
सुरेश बाबा बताते हैं कि पिछली बार नालों की सफाई के नाम पर सिर्फ झाडू लगवा दी गई थी। बारिश में जलभराव होने लगा। इसकी शिकायत चेयरमैन से की तो उन्होंने दोबारा सफाई करवाई और तब राहत मिली।

नियमित हो नालों की सफाई
मुरलीधर मिश्रा का कहना है कि स्वच्छता अभियान पर इतना जोर दिया जाता है फिर भी गंदगी कम नहीं हो रही। शहर में नालों की सफाई के बाद यह भी ध्यान रखा जाए कि सफाई का कार्य नियमित होता रहे, ताकि ज्यादा सिल्ट एकत्रित न हो पाए।
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