हरपालपुर। करीब 117 साल पुराने जर्जर हो चुके कोतवाली के भवन को जर्मीदोज कराने का काम शुरू करा दिया गया है। अब यहां पर नवीन भवन की भी आस जाग गई है।
हरपालपुर कोतवाली का संचालन का यहां पर वर्ष 1961 में शुरू हुआ था। जिस भवन में कोतवाली संचालित हो रही थी, वह भवन वर्ष 1905 में खैरूद्दीनपुर स्टेट के राजा ने अपने घोड़ों के लिए घुड़साल के लिए बनवाई थी। जर्जर हो चुके भवन में बरसात के समय कार्यालय, बैरकों व आरक्षी आवासों की छतों से पानी टपकता था, जिससे पुलिस कर्मियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
वर्ष 1961 से पहले हरपालपुर कोतवाली क्षेत्र में आने वाले क्षेत्र थाना सांडी में आते थे। हरपालपुर कोतवाली में 79 राजस्व गांव समेत करीब एक सैकड़ा मजरों की करीब ढाई लाख आबादी आती है। जिसमें से 14 राजस्व गांवों को नवनिर्मित कोतवाली सवायजपुर से संबद्ध किया गया है। कोतवाली में तैनात 27 कांस्टेबल में 15 पुलिस कर्मी और नौ महिला कांस्टेबलों में से पांच किराये के मकान में रह रहीं हैं। प्रभारी निरीक्षक आनंद नारायण त्रिपाठी ने बताया कि नवनिर्मित आवास हस्तांतरित होने के बाद समस्या दूर हो जाएगी।
दो प्रभारी निरीक्षक समेत 49 पुलिस कर्मियों की है तैनाती
हरपालपुर कोतवाली में दो प्रभारी निरीक्षक के साथ ही आठ उप निरीक्षक, दो मुख्य आरक्षी, 27 आरक्षी व नौ महिला आरक्षी, एक कंप्यूटर ऑपरेटर, एक चालक की तैनाती है। तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक भगवान चंद्र वर्मा ने चार वर्ष पूर्व जनसहयोग से आगंतुक कक्ष, बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया था। थाना परिसर में सात वर्ष पहले उप निरीक्षकों के लिए छह आवास बनाए गए थे।
दो माह पहले जर्जर भवन की हुई थी नीलामी
हरपालपुर कोतवाली के जर्जर भवन की 13 अक्तूबर को सीओ विनोद कुमार दुबे व नायब तहसीलदार कटियारी राजेश कुमार की मौजूदगी में नीलामी हुई थी। नीलामी प्रक्रिया में नौ लोगों ने भाग लिया था। जर्जर भवन का मूल्यांकन 2,39,768 रुपये हुआ था। जिसके सापेक्ष 2,70,000 रुपये की बोली लगाने वाले शोएब को नीलामी में भवन मिला था। भवन पर मजदूरों का हथौड़ा चल रहा है। नवीन भवन के लिए करीब दो साल पहले करीब 70 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था।