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सौ पक्की दुकानों की दरकार

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मंडी परिसर में कुछ इस बनाई गई हैं अस्थाई दुकानें। संवाद - फोटो : HARDOI
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हरदोई। मंडी समिति में शुल्क अदा करने के बाद भी अस्थायी दुकानें हटाने को लेकर व्यापारियों और प्रशासन के बीच विवाद तो फिलहाल टल गया है। लेकिन अस्थायी दुकानों में व्यापार कर रहे व्यापारी असमंजस में हैं। 32 साल में राजस्व 16 लाख से बढ़कर 16 करोड़ हो गया लेकिन व्यापारियों की समस्या कम नहीं हुई है। उनका कहना है कि अगर परिसर में 100 दुकानें और बन जाएं तो काफी हद तक उनकी परेशानी कम हो जाएगी।
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अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान उपजे विवाद को लेकर मंगलवार को चर्चा में आई शहर की नवीन गल्ला मंडी 32 साल से विकास की बाट जोह रही है। शहर के सरकुलर रोड पर 1985 में नवीन गल्ला मंडी की स्थापना व निर्माण कराया गया था। मंडी में शुरुआत में कुल 90 दुकानें बनवाई गईं थीं। इनमें 10 दुकानें ए श्रेणी, 30 दुकानें बी श्रेणी, 40 दुकानें सी श्रेणी और 10 गोदामें शामिल थीं। इससे पहले तक शहर में गल्ले का कारोबार सीतापुर रोड, रेलवेगंज मंडी व स्टेशन के पास रोड पर चलता था।
शुरुआती दौर में व्यापारियों ने मंडी में आकर कारोबार करने से मना कर दिया, जिसके चलते प्रशासन व मंडी के अधिकारियों ने व्यापारियों को मंडी परिसर में सुविधाएं दिलाने का आश्वासन दिया। कारोबारियों को मंडी में शिफ्ट कराया था। मंडी से जुड़े पुराने व्यापारियों की माने तो जब व्यापारी मंडी में शिफ्ट हुए थे, तब लगभग 250 लाइसेंस थे। जिन्हें पक्की दुकानें मिल गईं वो उनमें शिफ्ट हो गए, अन्य लोगों को अस्थायी दुकानेें लगाने को कह दिया गया था।
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इसके बाद दुकानों की संख्या और कारोबार में तो बढ़ोतरी हुई, लेकिन विकास नहीं हुआ। पिछले 32 साल में मात्र 230 दुकानें और बनवाई जा सकीं। जबकि लाइसेंस की संख्या कई गुना बढ़ गई है। इसके कारण अस्थायी दुकानें लगाने वाले व्यापारियों की परेशानी बढ़ती गई। व्यापार मंडल के अध्यक्ष वेद प्रकाश गुप्ता समेत अन्य लोगों ने बताया कि मंडी में खाली जमीनों पर टाट लगाकर दुकानों का संचालन करना व्यापारियों की मजबूरी है। मंडी में कम से कम सौ दुकानों का निर्माण कराया जाए, दुकानों का निर्माण होने पर मंडी से काफी हद तक अतिक्रमण खत्म हो जाएगा।
तीन गुना बढ़े लाइसेेंस
हरदोई। 1988 में जब शहर की नवीन गल्ला मंडी को क्रियाशील कर उसमें व्यापारियों को शिफ्ट कराया गया तब गल्ला कारोबार के लिए लगभग 250 लोगों ने लाइसेंस ले रखे थे। मंडी के पुराने व्यापारियों के अनुसार मंडी के क्रियाशील होने के बाद पहले साल मंडी को मंडी शुल्क के रूप में 16 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। पिछले 32 साल में लाइसेंस की संख्या 250 से बढ़कर 700 तक पहुंच गई, जबकि मंडी राजस्व का आंकड़ा 16 लाख से 16 करोड़ तक तक जा पहुंचा है। मंडी के पुराने व्यापारियों के अनुसार अब तक व्यापारियों के पंजीकरण की संख्या में तीन गुना वृद्धि हुई है।
200 दुकानों का प्रस्ताव पर भूमि कम
हरदोई। व्यापार मंडल के अध्यक्ष वेद प्रकाश गुप्ता ने कहा कि 1988 में जब मंडी क्रियाशील हुई थी, तब लाइसेंस संख्या के सापेक्ष इसका क्षेत्रफल पर्याप्त था। अब लाइसेंस और आवक, दोनों चीजें बढ़ी हैं। परिसर में 200 दुकानों का निर्माण कराने का प्रस्ताव दिया जा चुका है, लेकिन हकीकत ये है कि मंडी में 100 से अधिक दुकानों के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है। अगर व्यवस्था दुरुस्त रखनी हैं तो प्रशासन को मंडी का क्षेत्रफल बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए।
व्यापारियों ने बताई समस्या
मंडी में अस्थायी दुकान बना कारोबार करने वाले गुड्डू गुप्ता ने बताया कि कई सालों से वह यहां कारोबार कर रहे हैं। दुकान के लिए भी बार आवेदन कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
व्यापारी ईश्वरचंद्र गुप्ता ने बताया कि मजबूरन अस्थायी दुकानें बना कारोबार कर रहे हैं। बारिश के मौसम में दुकान में पानी आने पर अक्सर आवक खराब हो जाती है। अगर दुकानें मिल जाएं तो राहत मिले।
नरेश कुमार ने बताया कि दुकानें अस्थायी होने के कारण दुकानदारों को परेशानी होती है। अब तक दर्जनों बार प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन परिसर में दुकानों के अभाव के चलते अब तक पक्की दुकान नहीं मिल सकी है।
अनिल कुमार ने बताया कि व्यापारी अव्यवस्था का दंश झेल रहे हैं। मंडी प्रशासन अतिक्रमण पर कार्रवाई करने की बात कह रहा है, बेहतर होता है कि पहले व्यापारियों को पर्याप्त संख्या में दुकानें मुहैया कराई जातीं। इसके बाद अतिक्रमण पर कार्रवाई की जाती।
200 से 250 लोग निष्क्रिय, फड़ का दुरुपयोग
हरदोई। मंडी सचिव बबलू लाल ने बताया कि मंडी की व्यवस्था को दुरुस्त रखने में व्यापारियों की अहम भूमिका है। मंडी में काम करने के लिए सात सौ लोगों ने लाइसेंस ले रखा है, लेकिन वास्तविकता ये है कि इनमें लगभग 200 से 250 लोग निष्क्रिय हैं। ऐसे लोगों ने भी फड़ कब्जा रखा है, उसका दुरुपयोग होता है। ऐसे निष्क्रिय लोग अतिक्रमण हटा लें तो खाली भूमि का व्यापारी प्रयोग कर सकते हैं।
व्यापार मंडल से हुई वार्ता के तहत ऐसे लाइसेंस धारियों को चिह्नित किया जाएगा, जिनका तीन साल का मंडी टैक्स निल है या सालाना औसत 20 हजार से कम है। व्यापारियों के सहयोग से उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मंडी सचिव ने कहा कि मंडी प्रशासन के लिए किसान व व्यापारियों का हित सर्वोपरि है। मंडी प्रशासन की ओर से परिसर में 200 दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। कोशिश की जाएगी कि शासन से अनुमति दिला कम से कम 100 दुकानों का जल्द निर्माण कराया जाए। परिसर की अन्य व्यवस्थाओं को भी दुरस्त कराया जाएगा।
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