भरावन। 88 हजार ऋषि-मुनियों की तपोस्थली नैमिषारण्य से सोमवार को शुरू हुई पौराणिक 84 कोसी परिक्रमा यात्रा सीतापुर कोरौना से होते हुए मंगलवार सुबह जिले में पहुंची। गोमती पुल के पास एसडीएम संडीला मनोज श्रीवास्तव समेत प्रशासनिक अधिकारियों व लोगों ने रामादल पर पुष्प वर्षा कर यात्रा में शामिल संतों का स्वागत किया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने हर्रैया पहुंचकर डेरा डाला।
मंगलवार सुबह कोरौना से निकली परिक्रमा यात्रा सात बजे सीतापुर-हरदोई सीमा पर स्थित गोमती पुल पहुंची। यहां पहले से ही मौजूद एसडीएम संडीला, तहसीलदार भीमचंद्र व एसओ संत प्रसाद उपाध्याय ने प्रशासन की ओर से यात्रा की अगवानी की। संतों का परंपरागत रूप से माल्यार्पण कर स्वागत किया गया।
इसके बाद बोल कड़ाकड़ सीताराम व रामादल की जय के उद्घोष के साथ यात्रा जिले के पहले पड़ाव स्थल ग्राम हर्रैया पहुंची। यहां ग्रामीणों ने परंपरागत रूप से यात्रा का स्वागत व अभिवादन किया। यात्रा में शामिल लगभग दो लाख श्रद्धालुओं व यात्रा की अगुवाई कर रहे संतों ने हर्रैया गांव के पास तीन किलोमीटर की दूरी में डेरा डाल दिया। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो इसके लिए प्रशासन की ओर से पानी के लिए टैंकर मुहैया कराए गए। स्वास्थ्य विभाग व राजस्व विभाग समेत अन्य विभागों की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्टॉल लगवाए गए। परिक्रमा कमेटी के अध्यक्ष महंत भरत दास व सचिव महंत संतोष दास ने बताया कि कई वर्षों से वह यात्रा की अगुवाई कर रहे हैं।
15 दिन की परिक्रमा का एकादशी को होगा समापन
भरावन। सोमवार को नैमिष धाम से शुरू हुई 15 दिवसीय परिक्रमा यात्रा का समापन एकादशी को मिश्रिख स्थित दधीचि आश्रम पर होगा। परिक्रमा यात्रा 10 जगह से होकर गुजरेगी। इसमें सीतापुर के कोरौना, देवगवा, मंडराआ, जरीगवा, नैमिषारण्य, कोल्हुआ बरेठी व मिश्रिख समेत हरदोई जिले में चार हर्रैया, नगवा, उमरारी, साखिन आदि स्थल शामिल हैं।
स्कंद पुराण में है यात्रा का उल्लेख
भरावन। मान्यता है कि 84 कोसी परिक्रमा यात्रा मानव के समस्त पापों को नष्ट कर उसे चौरासी लाख योनियों के जन्म मरण के चक्र से मुक्ति दिलाती है। स्कंद पुराण में इस 84 कोसी परिक्रमा का उल्लेख मिलता है। पुराण के मुताबिक ये परिक्रमा सबसे पहले भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने की थी। स्कंद पुराण में इस बात का वर्णन है कि भगवान श्रीराम ने भी ब्रह्मदोष से मुक्ति पाने को अयोध्यावासियों के साथ ये परिक्रमा की थी। यही वजह है कि परिक्रमा में शामिल श्रद्धालुओं के जत्थे को रामादल कहा जाता है। माना जाता है कि जो लोग पूरी परिक्रमा नहीं कर पाते, वह अगर मिश्रिख तीर्थ में पांच दिन तक चलने वाली पंचकोसी परिक्रमा पूर्ण कर लें तो भी वह पुण्य के भागी हो जाते हैं।
परिक्रमा के दौरान इन देव स्थलों के होंगे दर्शन
भरावन। नैमिष धाम से शुरू हुई 84 कोसी परिक्रमा के दौरान यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को हरदोई व सीतापुर में पड़ने वाले जानकी कुंड, कुमनेश्वर, कुर्कुरी, मानसरोवर, कोटीश्वर, महादेव, कैलाश, हत्याहरण, नर्मदेश्वर, दस कन्या, जगन्नाथ, गंगा सागर, कपिल मुनि, नागालय, नीलगंगा, श्रंगी ऋषि, द्रोणाचार्य पर्वत, चंदन तालाब, मधुवसनक, व्यास गद्दी, मनु सतरूपा तपस्थली, ब्रह्मवर्त, दशाश्वमेघ, हनुमान गढ़ी, यज्ञवाराह कूप, हंस-हंसिनी, देव-देवेश्वर समेत रुद्रावर्त आदि के दर्शन का भी सौभाग्य मिलेगा।
कार और हाथी लेकर पहुंचे संत
भरावन। यात्रा की अगुवाई कर रहे जनपद सीतापुर के पहला बाबा आश्रम के महंत व परिक्रमा यात्रा कमेटी के अध्यक्ष भरतदास व बनगढ़ आश्रम के महंत एवं परिक्रमा कमेटी के सचिव संतोष दास खाकी फूल मालाओं व चक्र से सुसज्जित कार पर सवार नजर आए। वहीं सीतापुर के खेतुई आश्रम के महंत संत नागेंद्र दास हाथी पर सवार होकर यात्रा में शामिल हुए। इसके साथ ही अन्य कई संत व बड़ी संख्या में श्रद्धालु लग्जरी वाहनों के साथ यात्रा में शामिल नजर आए। वाहनों की साज सज्जा आकर्षण का केंद्र रही।
पूरे देश से जुटे श्रद्धालु
भरावन। यात्रा में पड़ोसी देश नेपाल समेत देश के राजस्थान, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, बिहार समेत अन्य कई प्रांतों के श्रद्धालु भी शामिल हुए हैं। कमेटी के पदाधिकारियों के अनुमान के इस बार यात्रा में लगभग दो लाख श्रद्धालु शामिल हुए हैं।
सिर पर जटा, हाथ में बंदूक, बम भोले का उद्घोष
भरावन। परिक्रमा यात्रा में अनुयाइयों के साथ शामिल हुए सीतापुर के बनगढ़ आश्रम के जटाधारी संत बब्बू दास की खाकी यात्रा के दौरान हाथ में लाइसेंसी बंदूक थाम, रामादल की जय के साथ ही बम बम भोले का उद्घोष करते दिखाई दिए। संत बब्बू का ये अंदाज श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहा।
मोबाइल टॉयलट व टैंकर रहे उपलब्ध
भरावन। प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं कीच सुविधा के लिए पड़ाव के स्थल के पास ही कई मोबाइल टॉयलेट समेत पानी के टैंकर उपलब्ध कराए गए। रात में श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए पड़ाव स्थल के चारों तरफ लाइटिंग कराए जाने के साथ ही आपूर्ति दुरुस्त रखने के लिए कई जेनरेटर लगाए गए।
गोवंशों के साथ यात्रा में शामिल हुए संत
भरावन। 84 कोसी परिक्रमा में इस एक और नजारा खासे चर्चा में रहा है। संतों और श्रद्धालुओं के साथ ही यात्रा में सीतापुर के संत मनोज दास तीन गोवंशों को लेकर शामिल हुए। संत मनोज दास ने बताया कि गाय सनातम धर्म का आधार हैं। मान्यता है कि मनुष्य इस यात्रा से तर जाता है, ऐसे में वह अपने साथ ही अपने गोवंशों को भी सद्भावना के साथ लेकर यात्रा में शामिल हुए हैं।