हरदोई। नाबालिग से दुष्कर्म के सात साल पुराने मामले में एक शख्स को दोषी करार देते हुए विशेष न्यायाधीश (पॉस्को एक्ट) मनमोहन सिंह ने 10 साल की सजा सुनाई। साथ ही 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना न देने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। जुर्माने की आधी रकम बतौर क्षतिपूर्ति पीड़िता को भी देने के आदेश अपर जिला जज ने दिए हैं।
बिलग्राम कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया कि 26 जून 2017 की सुबह पुत्री (17) शौच के लिए गई थी। वहीं पर पहले से मौजूद गांव का ही सहदेव उसे बहलाकर अपने साथ ले गया। पुलिस ने सहदेव के खिलाफ बहलाकर कर ले जाने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी।
मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयान में किशोरी ने अमित उर्फ अन्नू, जोगराज, पुत्तीलाल, सतीश का नाम भी लिया था। पुलिस ने सहदेव के खिलाफ दुष्कर्म की धाराओं में व सुदेश उर्फ सुधीर, अमित उर्फ अन्नू के खिलाफ बहलाकर ले जाने की धाराओं में आरोप पत्र दाखिल किया था। 21 दिसंबर 2019 को पुत्तीलाल, जोगराज, सतीश को कोर्ट ने तलब किया था।
पूरे मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से छह गवाहों को पेश किया गया। साथ ही 10 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए। 138 पेशियों की सुनवाई के बाद न्यायालय ने सहदेव को सजा सुनाई है। सुदेश उर्फ सुधीर, सतीश, पुत्तीलाल, जोगराज, अमित उर्फ अन्नू को दोष मुक्त किया है।
प्रेम प्रसंग था, लेकिन नाबालिग की सहमति का कोई मतलब नहीं
अपर जिला जज मनमोहन सिंह ने फैसले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर पाया कि सहदेव का किशोरी के साथ प्रेम प्रसंग था। किशोरी अपनी मर्जी से सहदेव के साथ गई थी। अपर जिला जज ने कहा कि साक्ष्यों से स्पष्ट हुआ है कि पीड़िता की उम्र 16 साल से कम है। इसलिए कानून की दृष्टि से किशोरी की सहमति कोई मायने नहीं रखती।