शुगर मिल प्रबंधन एक बार फिर अपने वादे से मुकर गया है। मंत्री की मौजूदगी में पिछले पेराई सत्र का पूरा भुगतान करने का लिखित वादा श्रसर गन्ना किसानों के लिए छलावा साबित हुआ है।
किसानों का 15 फरवरी के बाद खरीदे गए गन्ने का 99 करोड़ का भुगतान अभी बकाया चल रहा है। सिंभावली शुगर मिल प्रबंधन एक बार फिर किसानों से किए वादे से मुकर गया है। किसानों ने 20 सितंबर को मिल परिसर में
भाकियू नेता दिनेश खेड़ा के नेतृत्व में तीन सप्ताह आंदोलन व भूख हड़ताल की थी। तब राज्य मंत्री मदन चौहान की मौजूदगी में 9 अक्तूबर को किसानों और मिल प्रबंधन के बीच समझौता हुआ था।
इसमें प्रबंधन ने 20 नवंबर तक किसानों का समस्त गन्ना बकाया चुकता करने का लिखित वादा किया था। तय तारीख पर मिल प्रबंधन वादे से मुकर गया। अभी तक 15 फरवरी 2015 से पहले खरीदे गए गन्ने का पेमेंट ही किया गया है।
फिलहाल 15 फरवरी के बाद खरीदे गए गन्ने का 99 करोड़ रुपया अभी बकाया है। बकाया भुगतान मिलने की आस में किसानों के चेहरे लटक गए हैं। सिंभावली गन्ना समिति के सचिव राजीव सेठ का कहना है
कि किसानों के साथ हुए समझौते के तहत 20 नवंबर तक पिछला सारा पेमेंट चुकता होना था, लेकिन मिल प्रबंधन ने महज 15 फरवरी तक खरीदे गए गन्ना का ही भुगतान भेजा है। जिससे 99 करोड़ का पेमेंट बाकी रह गया है।
गन्ने का भुगतान न मिलने से किसानों के कर्ज की अदायगी और ब्याह-शादी की तारीख तय करने वाले किसानों के चेहरे लटक गए हैं। भाकियू नेता दिनेश खेड़ा का कहना है कि शुगर मिल प्रबंधन लगातार वादा खिलाफी करता आ रहा है।
अगर 30 नवंबर तक पिछला पेमेंट पूरी तरह चुकता नहीं किया गया, तो इसके विरोध में किसान मिल को हो रही गन्ना सप्लाई रोककर बड़ा आंदोलन करेंगे। नोटबंदी के चलते रुपये की व्यवस्था नहीं हो पाई है।
ऐसे मेें किसानों से किया गया वादा पूरा नहीं हो सकता है। फिलहाल रुपये का इंतजाम नहीं है। मिल 30 दिसंबर तक किसानों का समस्त पुराना भुगतान कर देगा। - सुधीर कुमार, जीएम केन, सिंभावली शुगर मिल।