केन्द्र सरकार ने किसानों को पुराने नोट से बीज खरीदने की छूट देकर उनके हाथ में झुनझुना थमा दिया है। पहले तो किसानों के पास नोट थे ही कम, उन्हें भी अधिकांश लोगों ने बैंक में जमा करा दिया है, जिससे किसानों पर आफत आ गयी है।
ग्रामीण क्षेत्र के बैंकों में नया कैश नहीं मिल रहा है। गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं होने से अधिकांश किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। अगर थोड़ा बहुत भुगतान हुआ भी तो किसानों ने अपने घरेलू काम में प्रयोग कर लिए।
जिन किसानों पर घर के अंदर 1000 और 500 के नोट रखे भी थे, उन्होंने कई दिन लाइनों में लगकर उसको बैंकों में जमा करा दिया। कुल मिलाकर हालत यह है कि किसान एक एक पैसे को परेशान हैं और जिन परिवारों में शादी है, उन पर तो संकट के बादल छाये हैं।
ऐसे में केन्द्र सरकार पुराने नोटों से बीज खरीदने की छूट का बेशक प्रचार कर रही है। किसान इससे संतुष्ट नहीं है, क्योंकि बिना खाद के कोई फसल नहीं बोयी जा सकती। रसूलपुर के किसान सत्येंद्र चौधरी ने कहा है कि किसानों का अधिकांश पैसा सहकारी बैंकों में फंसा है।
सहकारी बैंक भुगतान नहीं कर रहे हैं। किसानों को पुराने नोट नहीं बल्कि नये नोट तत्काल दिलाये जाएं। जिला सहकारी बैंकों की शाखाओं में किसानों के भुगतान की व्यवस्था की जाए। अन्यथा किसान अपनी फसलों की बुवाई नहीं कर पायेगा।