अब जिला पुलिस व्हाटस एप पर सक्रिय रहेगी। चौकी प्रभारी से लेकर अधिकारी तक व्हाटस एप पर सक्रिय होंगे। व्हाटस एप से ही उच्चाधिकारियों को घटनास्थल की जानकारी देंगे।
एसप अलंकृता सिंह ने चौकी प्रभारी सहित थाने में तैनात दरोगाओं को निर्देश जारी कर दिए हैं। इस तकनीक से एक ओर जहां आला अधिकारी हालात से वाकिफ हो सकेंगे, वहीं अधीनस्थ कर्मचारी अपनी लोकेशन नहीं छिपा सकेंगे।
जिले में अभी तक वरिष्ठ अधिकारी ही अपने सीयूजी नंबरों पर व्हाटस एप का प्रयोग करते हैं। पुलिसकर्मियों को तकनीकी जानकारी देने के लिए थानों में जनरल डायरी से लेकर अन्य कार्यों के लिए थानों को कंप्यूटरीकृत किया गया है।
इसके बाद फोन पर ही एफआईआर लिखवाने के निर्देश भी पुलिस अधिकारियों को मिले हैं। लोगों के बीच तक पुलिस को पहुंचाने के लिए शासन ने यूपी 100 की शुरुआत की है। इसके लिए पुलिस को जनता से जोड़ने के लिए सोशल मीडिया सबसे बेहतर संचार माध्यम है।
अब प्रशासनिक अधिकारियों को दारोगा और चौकी प्रभारी को सरकारी नंबर देकर व्हाटस एप चलाने का आदेश मिला है। कोई भी घटना होती है तो सबसे पहले बीट सिपाही और चौकी प्रभारी मौके पर पहुंचते हैं।
ऐसे में आला अधिकारियों तक सही जानकारी नहीं पहुंचने पर कई बार छोटा सा मामला भी बड़ा रूप ले लेता है। अब मोबाइल में फोटो व वीडियो बनाकर व्हाटस एप पर अपलोड करना होगा। जो सीधे एसपी सहित अन्य अधिकारियों के नंबर पर भेजी जाएगी।
अभी तक पुलिस पर रिपोर्ट दर्ज करने में घटना के तथ्यों को छुपाने या बदलने के आरोप लगते रहे हैं। जिससे विभाग की छवि धूमिल होती है। साक्ष्यों में हेर फेर से आरोपियों को भी लाभ मिलता है।
पुलिस की इस कार्यप्रणाली से कई बार पीड़ित या खुद पुलिस को भी दिक्कत होती थी। लेकिन अब घटनास्थल के फोटो और वीडियो अधिकारियों को भेजने से पुलिसकर्मी मामला दर्ज करने में गड़बड़ी नहीं कर सकेंगे।
साथ ही अपनी गलत लोकेशन बताने पर मामला पकड़ लिया जाएगा। संवेदनशील मामलों में हालात बिगड़ने की अधिक आशंका रहती है। व्हाटस एप द्वारा लगातार संदेश व वीडियो भेजने के समय से उनके घटनास्थल पर होने या न होने की जानकारी भी मिल जाएगी।