प्री मानसून की दस्तक से धान की पैदावार करने वाले किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। मौसम मनमाफिक देख किसान धान की पौध तैयार करने में जुट गए हैं। वहीं, राजकीय बीज गोदामों से धान के बीज की बिक्री तेज हो गई है।
उधर, इस बार जिले में धान का रकबा बढ़ने के आसार हैं। कई वर्षों से गन्ने के भुगतान में तरह-तरह के अड़चन के कारण गन्ने का रकबा तेजी से घटता जा रहा है। इसके चलते किसानों का गन्ने की खेती से मोह भंग होता जा रहा है।
आलू, गेहूं और धान की खेती की ओर रुझान बढ़ रहा है। अबकी मई महीने के आखिर में प्री मानसून की दस्तक से धान उत्पादक किसानों के चेहरे पर खुशी छा गई है और वे धान के पौध रोपने की तैयारी में जुट गए हैं।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार बीते वर्ष जिले में 30 हजार हेक्टेयर रकबे में धान की रोपाई की गई थी। इस बार धान के रकबे में करीब दो हजार हेक्टेयर बढ़ोत्तरी के आसार हैं।
किसानों के रुझान को देखते हुए राजकीय बीज गोदामों पर धान के बीज का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करा दिया गया है। बीज गोदामों से किसानों को धान के बीज पर 14 रुपये प्रति किलो का अनुदान दिया जा रहा है।
गांव सरावा निवासी ईश्वर का कहना है कि प्री मानसून ने दस्तक दे दी है। अनुमान है कि धान की फसल के लिए इस बार मौसम अच्छा रहेगा।
गांव दस्तोई निवासी सत्यप्रकाश का कहना है कि प्रत्येक वर्ष बारिश न होने से धान की फसल कमजोर रह जाती है। इस बार वह ज्यादा धान की रोपाई करेंगे।
गांव सलाई निवासी हरिराज का कहना है कि इस बार प्री मानसून ने जल्द दस्तक देकर अच्छी बरसात के संकेत दिए हैं। यह मौसम धान की फसल के लिए अच्छा होगा।
गांव दयानगर निवासी हरीश चंद का कहना है कि गन्ने का चीनी मिल समय पर भुगतान नहीं कर रहीं। इसलिए किसानों का रूझान आलू, गेहूं और अब धान की खेती की ओर बढ़ा है।