यातायात माह समाप्त होने को है और ट्रैफिक व्यवस्था जस की तस है। प्रमुख चौपलों पर लगे ट्रैफिक सिग्नल टूटकर गायब हो चुके हैं। ट्रैफिक सुधार की कोई भी योजना अभी तक परवान नहीं चढ़ी है।
जिससे बेहद खराब व्यवस्था से जूझ रही जनता को राहत मिलना संभव नहीं लग रहा है। लगभग छह वर्ष पूर्व नगर में तहसील चौराहे, मेरठ तिराहा, अतरपुरा चौपला सहित प्रमुख चौपलों पर यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए।
साथ ही जेब्रा क्रॉसिंग के लिए लाइन भी खींची गईं। लेकिन कुछ ही दिन बीतने पर ये सब कुछ खत्म हो गया। प्रत्येक वर्ष नवंबर माह को यातायात माह के रूप में मनाया जाता है। जिसमें व्यवस्था सुधारने के दावे किए जाते हैं।
इस वर्ष मनाए जा रहे यातायात माह बीतने में मात्र तीन दिन बचे हुए हैं लेकिन यहां व्यवस्था चौपट है। जिसके चलते अव्यवस्थाओं के बीच दौड़ रहे ट्रैफिक की व्यवस्था सुधारना पुलिस के लिए एक चुनौती बन चुका है।
कुल मिलाकर अधिकारियों द्वारा ही अपने दावों की पोल खोलने में कोई कमी नहीं छोड़ी जाती है। यातायात प्रभारी योगेंद्र मलिक का कहना है कि यातायात व्यवस्था सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं।
ट्रैफिक सिग्नल की मरम्मत को लेकर मुख्यालय को पत्र भेजा जा चुका है। जनता को बेहतर सुविधा देना ही पुलिस की प्राथमिकता है।