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परंपरागत ढंग से की गोवर्धन पूजा

Mon, 31 Oct 2016 08:34 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
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गोवर्धन पूजा - फोटो : अमर उजाला
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महिलाओं ने सोमवार को परंपरागत ढंग से गोवर्धन पूजा की। नगर के विभिन्न मंदिरों में अन्नकूट प्रसाद का वितरण किया गया। प्रसाद लेने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। सोमवार सुबह गोवर्धन पूजा के अवसर पर प्राचीन चंडी मंदिर,
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बुलंदशहर रोड स्थित मंशा देवी मंदिर, रेलवे रोड स्थित देवी मंदिर, चंडी मंदिर रोड स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर, नई शिवपुरी स्थित हरमिलाप वैष्णो देवी मंदिर, माहेश्वरी मंदिर, नई शिवपुरी स्थित शीतला माता मंदिर,

गढ़ रोड स्थित हनुमान मंदिर, गायत्री मंदिर, पक्का बाग स्थित पंचायत गौशाला सहित अनेक मंदिरों में अन्नकूट प्रसाद का वितरण किया गया। अन्नकूट प्रसाद में एक मिश्रित सब्जी के साथ ही कढ़ी चावल और हलुवा पूरी शामिल होता है।
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श्री बांके बिहारी गोवर्धन महाराज को अन्नकूट प्रसाद का भोग लगाने के पश्चात श्रद्धालुओं में अन्नकूट प्रसाद का वितरण किया गया। ज्योतिषाचार्य संतोष त्रिपाठी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र देवता का अहंकार तोड़ने के लिए गोवर्धन पर्वत की पूजा की थी।

पूजन के दौरान भगवान को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों का भोग लगाया गया था, जिसे अन्नकूट प्रसाद कहा जाता है। अन्नकूट प्रसाद प्राप्त करने के लिए मंशा देवी मंदिर में सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़ने लगी।

कार्यक्रम में शिव कुमार मित्तल, महेश तोमर, बिजेंद्र कंसल ,अजय गर्ग, सुरेश चंद गुप्ता, चीनू, सोनू सैनी उपस्थित रहे। गढ़ में पशु पालकों ने मवेशियों को झूल सहित नए रस्से धारण कराए और ग्वालों को घर बुलाकर उनसे मवेशियों को परंपरागत कहेड़ी सुनवाने की रस्म भी अदा कराई।

महिलाओं ने गोवर्धन पर्वत की गाथा और भगवान श्रीकृष्ण की महिमा से जुड़े गीत गाकर त्योहार मनाया। पंडित सुरेंद्र प्रसाद शर्मा और रमाशंकर तिवारी ने बताया कि अपनी पूजा अर्चना बंद होने से क्रुद्ध होकर भगवान इंद्र ने ब्रजवासियों को दंड देने के उद्देश्य से घनघोर बारिश कर दी थी,

जिससे त्राहि-त्राहि मचने पर सभी नर-नारी और पशु-पक्षी भगवान श्रीकृष्ण की शरण में पहुंच गए थे। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्का अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को सात दिनों तक उठाए रखा था। इसके उपलक्ष्य में दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है।
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