संवाद न्यूज एजेंसी
पिलखुवा। खेड़ा में शुक्रवार को हुए धमाके के बाद यह बड़ा तथ्य सामने आया है कि गांव और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में हजारों किरायेदार बिना पुलिस सत्यापन के रह रहे हैं। जो कभी भी बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों की चिंताएं अब बढ़ गई हैं।
पिलखुवा के गांव खेड़ा के पास एक बड़ा औद्याेगिक क्षेत्र है। जिसके कारण दूर-दराज से आए मजदूर यहां के ग्रामीणों के पास कमरा लेकर रहते हैं और लगातार बदलते रहते हैं, जिससे सत्यापन की प्रक्रिया अधूरी रह जाती है। ग्रामीणों के अनुसार खेड़ा गांव में करीब दो हजार पांच सौ परिवार किराए पर रहते हैं, जबकि पिलखुवा के राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े इलाकों में सात हजार से अधिक किराएदार हैं। मकान मालिक केवल आधार कार्ड देखकर कमरे दे देते हैं। मजदूर एक-दो महीने में काम छूटने पर कमरा छोड़ देते हैं। कई लोग बिना किराया दिए ही कमरे खाली करके निकल जाते हैं।
शुक्रवार को हुए धमाके वाले मकान में भी मजदूर रहते थे। पुलिस के अनुसार बंद कमरे में गैस रिसाव से विस्फोट हुआ, जिसने सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमजोरियां उजागर कर दीं। लगातार बदले जाने वाले किराएदारों के कारण पुलिस रिकॉर्ड अधूरे रहते हैं और पहचान सत्यापन नहीं हो पाता। पुलिस के अनुसार बिना वेरिफिकेशन रहना सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर खतरा है। सीओ अनीता चौहान ने कहा कि इलाके में रहने वाले सभी किराएदारों का वेरिफिकेशन जरूरी है और मकान मालिकों को जांच में लापरवाही नहीं करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि शुक्रवार की घटना के बाद पुलिस अब विशेष अभियान चलाकर किराएदारों का रिकॉर्ड मजबूत करेगी।