वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि ग्राम प्रधान के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट होकर यूजीसी कानून के खिलाफ खड़े हैं। ग्रामीणों ने खुले शब्दों में कहा कि यह कानून उनकी सामाजिक, धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के विरुद्ध है। पंचायत में यह निर्णय लिया गया कि यदि केंद्र सरकार द्वारा यूजीसी कानून को वापस नहीं लिया गया, तो आगामी चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को वोट नहीं दिया जाएगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस कानून को बिना जनसहमति और व्यापक चर्चा के लागू करने की तैयारी की जा रही है, जिससे ग्रामीण समाज की भावनाएं आहत हो रही हैं। पंचायत में मौजूद लोगों ने कहा कि उनका विरोध किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति से नहीं, बल्कि कानून की प्रकृति से है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव की जनता शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहती है। वीडियो के वायरल होने के बाद इस विरोध का असर क्षेत्रीय राजनीति और चुनावी माहौल पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है।