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हालात में नहीं आया सुधार, कतार बरकरार

Sun, 11 Dec 2016 09:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/हापुड़
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बैंकों और एटीएम में लगी लाइनें - फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के 33 वें दिन भी हालात में सुधार नहीं आया है। जिलेभर में एटीएम सुविधा बदहाल पड़ी है। 90 फीसदी एटीएम अभी तक कैश नहीं दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि बैंक अफसरों की लापरवाही से एटीएम सुविधा बदहाल है।
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बैंक अफसर नहीं चाहते कि मोदी का अभियान सफल हो, इसलिए परेशान किया जा रहा है। वहीं, रविवार को दिन भर लोग शहर के एटीएम के चक्कर लगाते रहे। सिर्फ बुलंदशर रोड स्थित एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम से कैश निकला।

नोटबंदी के बाद से ग्राहक पैसों की निकासी के लिए सिर्फ बैंकों पर ही निर्भर हैं। जिले के अधिकांश एटीएम अभी भी शोपीस बने हुए हैं। सिर्फ 10 फीसदी एटीएम से ही कैश निकल रहा है। ऐसे में बैंकों की छुट्टियों में दिन निकलते ही एटीएम पर लोगों की लंबी कतारें लग जाती हैं।
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रविवार को बुलंदशर रोड स्थित एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम से कैश निकला। ठंड में दिन भर लाइन में लगे रहने के चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

वहीं, एलडीएम एपी चतुर्वेदी ने बताया कि बैंकों में कैश की कमी है, ग्राहक बैंकों पर ही ज्यादा संख्या में पहुंचते हैं। नई करेंसी के लिए एटीएम अभी अपग्रेड नहीं हो सके हैं, अपग्रेड होते ही ग्राहकों को कैश किल्लत की समस्या से राहत मिल जाएगी।

‘एटीएम बने शोपीस, कैसे करें कैश का इंतजाम’
पैसों की बेहद जरूरत है, बैंकों में अवकाश चल रहा है और एटीएम शोपीस बने हुए हैं। ऐसे में कहां से पैसों का इंतजाम करें। बैंक अफसर एटीएम चालू नहीं करना चाह रहे हैं, इससे भी परेशानी हो रही है। - सलमान, कोटला सादात
 
एटीएम सुविधा चालू हो जाए तो बैंकों के बाहर लगने वाली लाइनों से छुटकारा मिल जाएगा। लेकिन बैंक अफसर एटीएम को चालू नहीं कर रहे हैं। वह प्रधानमंत्री के मिशन को असफल करने में लगे हुए हैं। - राजेश, बैंक कालोनी

बैंक अफसर कहते हैं कि एटीएम अभी नई करेंसी के लिए अपग्रेड नहीं हैं, लेकिन 100 रुपये के नोट तो एटीएम में रखे जा सकते हैं। बैंक अफसरों की लापरवाही से समस्या झेलनी पड़ रही है। - संजय, शिवलोक कालोनी
 
बैंक कर्मियों पर भी कसेगा शिकंजा
 नोटबंदी के बाद आए दिन खुल रही बैंक कर्मियों की पोल ने उच्चाधिकारियों को चौकन्ना कर दिया है। काले धन को सफेद करने में हुए बड़े गोलमाल को पकड़ने के लिए बैंक कर्मियों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। ऐसे बैंक कर्मियों का ब्यौरा मांगा जा रहा है जिनके खातों में नोटबंदी के बाद एक लाख या इससे अधिक की धनराशि जमा हुई है।

बैंकों ने अपने विजीलेंस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे सभी शाखाओं से संदेह के दायरे में आने वाले कर्मियों का पूरा ब्यौरा जुटाएं। वहीं, आठ नवंबर के बाद खोले गए नए खातों, और बिना पैन कार्ड के जमा की गई बड़ी धनराशि की जांच के आदेश दिए गए हैं।

एक बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिले में करीब 10 शाखाओं के बैंक मैनेजर संदेह के घेरे में हैं। जिनकी फोरेंसिक ऑडिट के जरिये जांच की जाएगी। ऑडिट में बैंकों की सीसीटीवी फुटेज की जांच से बैंक में आने वाले संदिग्ध लोगों के संबंध में पूछताछ की जाएगी। बैंक में जमा कैश, निकासी, हजार और पांच सौ के जमा नोटों की गंभीरता से जांच की जाएगी।

बैंकों में लगी कॉलेजों के छात्रों की आईडी
नोटबंदी के शुरुआती दौर में जिले कई बैंकों में फर्जी आईडी के माध्यम से नोट बदलने का खेल हुआ। काले धन वालों ने स्कूल कॉलेजों में जमा छात्रों के दस्तावेजों से आईडी निकालकर एक ही दिन में लाखों रुपये की करेंसी एक्सचेंज कर ली।

विजीलेंस अधिकारी ऐसे बैंकों की जांच कर रहे हैं जिनमें एक की स्कूल छात्रों की काफी संख्या में आईडी लगी हों। इस खेल में शहर के कई बैंक शामिल हैं। विजीलेंस अधिकारियों के अनुसार जांच के बाद धांधली करने वाले कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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