जिले में किराएदारों की संख्या काफी है। आतंकी गतिविधियों के सामने आने पर समय-समय पर पुलिस द्वारा इनके सत्यापन कराने की बात कही जाती है। मगर ये दावे कोरे साबित हुए। जिले में कभी-कभी ही किराएदारों के सत्यापन की प्रक्रिया चलती है,
लेकिन पुलिस के लापरवाह रवैये और मकान मालिकों की लापरवाही के चलते ये मुहिम ठंडे बस्ते में चली गई। फिलहाल जिले में रहने वाले किराएदारों का कोई रिकॉर्ड पुलिस के पास नहीं है। जबकि, जिले का टाप मोस्ट आतंकियों से पुराना रिश्ता है।
हापुड़ एनसीआर के प्रमुख जिलों में शुमार है। ऐसे में देश या प्रदेश के किसी स्थान पर कोई घटना होती है तो पुलिस अलर्ट हो जाती है, लेकिन यह अलर्ट थोड़ी देर बाद ही खत्म हो जाता है। जबकि, हापुड़ के पिलखुवा निवासी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा टाप मोस्ट आतंकियों की श्रेणी में है।
इसके अलावा हेडली जैसा आतंकी भी हापुड़ में आकर रुक चुका है। वहीं, चार अन्य आतंकियों खिलाफ पोटा के तहत पहला केस भी हापुड़ कोतवाली में दर्ज हुआ था।
नगर व देहात के काफी मकानों में किराएदारों की संख्या काफी अधिक है। इन किराएदारों का पुलिस के पास कोई रिकार्ड नहीं है। वर्ष में एक या दो बार ही एसपी सहित आला अधिकारी किराएदारों के सत्यापन पर गौर करते हैं, लेकिन जल्द ही ये आदेश ठंडे बस्ते में चले जाते हैं।
कई फैक्ट्रियों में भारी संख्या में बाहरी लोग मजदूरी कर रहे हैं। इनमें बांग्लादेशी भी काफी हैं। इसकी पुष्टि भी पूर्व में हो चुकी है। कई बार नकली करंसी पकड़ी जाती है तो पाकिस्तान या आतंकी एजेंट की ओर भी शक जाहिर किया जाता है।
जबकि कूड़ा बीनकर परिवार पालने वाले काफी परिवार भी बांग्लादेश के ही बताए जाते हैं। पुलिस का जांच अभियान इनके खिलाफ परवान नहीं चढ़ता।
एसपी अलंकृता सिंह ने बताया कि किराएदारों का सत्यापन जरूरी है। साथ ही दुकानदारों व मकान मालिकों को नौकरों के सत्यापन का कार्य भी कराना चाहिए। मतगणना के बाद नए सिरे से किराएदारों का सत्यापन कराया जाएगा। सुरक्षा में कोई लापरवाही नहीं होने दी जाएगी।