संवाद न्यूज एजेंसी
हापुड़। जिले के सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी संख्या में लावारिस कुत्ते और पशु विचरण करते रहते हैं। यह आए दिन लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर देते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हर शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, सार्वजनिक खेल परिसर, बस स्टैंड और मुख्य मार्गों जैसे सार्वजनिक स्थानों से लावारिस कुत्तों को हटाने व इन्हें रोकने के लिए उचित बाड़ लगाने के आदेश दिए हैं। वर्तमान में पालिका के पास कोई आश्रय स्थल शहर में नहीं है। ऐसे में इन लावारिस कुत्तों को पकड़कर अधिकारी कहां रखेंगे ? इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जनपद में तीन नगर पालिका और एक नगर पंचायत है। इसमें किसी भी नगर निकाय के पास शेल्टर होम की व्यवस्था नहीं है। सार्वजनिक स्थलों पर कुत्तों का जमावड़ा है और जिले में पकड़े जाने के बाद इन्हें रखने की समस्या है। इससे साफ है कि जिले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कराने के लिए अधिकारियों को एड़ी-चोटी का जोर लगाना होगा। स्थान को चिह्नित कर निर्माण कराकर आश्रय स्थल के रूप में विकसित करना होगा, लेकिन यह आसान नहीं है। शहर में ही करीब 30 हजार से अधिक लावारिस कुत्ते हैं। इसमें से करीब पांच प्रतिशत लावारिस कुत्ते सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद रहते हैं। ऐसे में पालिका अधिकारियों के सामने बड़ी चुनौती रहेगी, जबकि शेल्टर होम की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों की है।
-सार्वजनिक स्थानों पर जमावड़ा
शहर के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, रामलीला मैदान, अस्पताल, स्कूलों के परिसर सहित कई सार्वजनिक स्थलों पर लावारिस कुत्तों का जमावड़ा लगा रहता है। इन स्थानों पर कुत्तों के झुंड के कारण आमजन को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार लोगों के घायल होने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। हालांकि, नगर पालिका इनका बंध्याकरण कराने के लिए कई बार टेंडर निकाल चुकी है। पालिका के आंकड़ें के अनुसार, पिछली बार चले बंध्याकरण के अभियान के दौरान 800 कुत्तों को पकड़ा गया। बाद में उन्हें उसी स्थान पर छोड़ दिया गया। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, हर माह कुत्ते काटने के करीब 2500 मामले तो शहरों से ही आते हैं। इन्हें एंटी रैबीज का टीका भी लगाया जाता है।
अधिशासी अधिकारी संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि अभी नगर पालिका के पास लावारिस कुत्तों के लिए व्यवस्थाएं न के बराबर हैं। इनके बधियाकरण के लिए बीच-बीच में टेंडर निकाला जाता है। फिर से करीब एक हजार कुत्तों के बधियाकरण के लिए टेंडर निकाला गया है। अब उच्च अधिकारियों के जो भी आदेश होंगे, उनका पालन कराया जाएगा।