नगर के चहुंमुखी विकास के लिए तैयार हापुड़ का मास्टर प्लान 2021 प्रदेश शासन की स्वीकृति के लिए एक साल से लखनऊ में अटका है। मंडलायुक्त के रिमाइंडर भेजने के बावजूद प्रदेश शासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। मास्टर प्लान पास होने के कारण जिले का विकास रुका हुआ है।
प्रदेश शासन के निर्देश पर हापुड़, पिलखुवा का मास्टर प्लान 2021 करीब एक दशक पहले पर बनना शुरू हुआ था। इससे पहला मास्टर प्लान सिर्फ 2005 तक के लिए ही बना था। बाद में गढ़ का मास्टर प्लान 2021 भी तैयार करने का निर्णय लिया गया।
पिलखुवा और गढ़ का मास्टर प्लान 2021 तो तीन साल पहले ही स्वीकृत हो गया था, लेकिन हापुड़ का मास्टर प्लान हापुड़ नया जिला बनने के कारण एनसीआर बोर्ड की आपत्तियों के कारण अटक गया।
दरअसल एनसीआर बोर्ड के अधिकारियों ने एचपीडीए के अधिकारियों को निर्देशित किया था कि हापुड़ के अधिकारियों के कार्यालय और निवास स्थानों को मास्टर प्लान में चिन्हित किया जाए। यह सब होने में ही एक साल से अधिक का समय लग गया।
मंडलायुक्त तथा शासन की आपत्तियों के बाद फाइनल मास्टर प्लान हापुड़ 2021 करीब एक साल पहले शासन की स्वीकृति को भेजा गया था, जो वहां पड़ा है। पिछले महीने एचपीडीएम उपाध्यक्ष आरके सिंह के अनुरोध पर मंडलायुक्त आलोक सिन्हा ने एक रिमाइंडर शासन को भेजा था, लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इसी तरह गढ़ का जोनल प्लान भी वहां लटका है। हापुड़ का मास्टर प्लान 2021 लागू नहीं होने से यहां का जोनल प्लान भी नहीं बन सका है। मास्टर प्लान के लागू होने के बाद शहर को सात जोन में बांटकर ड्रेनेज, सीवर लाइन आदि की व्यवस्था होनी है।
मास्टर प्लान में दिल्ली रोड से मेरठ रोड के लिए बाईपास बनना और विभिन्न योजनाओं के लिए आरक्षित किये गये हैं। विधायक गजराज सिंह ंने कहा कि इस मुद्दे पर वह प्रदेश के मुख्य सचिव से वार्ता करेंगे।