हापुड़। सिखैड़ा सीएचसी में जन्मे दो नवजात शिशुओं की मौत के मामले में सीएमओ ने बृहस्पतिवार को जांच की। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि एंबुलेंस 10 मिनट की देरी से पहुंची थी। एक नवजात की अवरनाल गले से लिपटी थी, जबकि दूसरे के फेफड़े बेहद कमजोर थे। जांच टीम ने परिजनों के बयान भी लिए हैं।
शकरपुर की प्रीति का प्रसव बुधवार दोपहर 12:37 बजे और कुचेसर चौपला निवासी प्रियंका का प्रसव रात में करीब दस बजे हुआ था। दोनों नवजात बच्चों को अलग-अलग समय पर एंबुलेंस से जिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया था। रास्ते में दोनों की मौत हो गई थी। मामले में मोबाइल की रोशनी में प्रसव कराने, ऑक्सीजन नहीं मिलने के आरोप लगे थे।
बृहस्पतिवार को सीएमओ डॉ. सुनील त्यागी ने टीम के साथ अस्पताल पहुंचकर जांच की। इसमें देखा कि अस्पताल में इनवर्टर और जनरेटर चालू अवस्था में थे। दोपहर 12 बजे लाइट जाने पर जनरेटर भी चलाया गया था, जिसका रजिस्टर में भी रिकॉर्ड देखने को मिला। रात दस बजे बिजली आपूर्ति आने के प्रमाण भी मिले।
अस्पताल में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और सिलिंडर भी मिले हैं। अस्पताल में जांच के बाद टीम ने गांवों में जाकर परिजनों से बात की। सीएमओ का कहना है कि उन्होंने भी बिजली आपूर्ति और ऑक्सीजन संबंधी समस्या नहीं बताई। एंबुलेंस व्यवस्था को परखा तो पता चला कि कॉल करने के दस मिनट में एंबुलेंस आ गई थी। कुछ देर कुचेसर चौपला फाटक पर एंबुलेंस फंसी जरूर थी। प्रारंभिक जांच के बाद सीएमओ ने दो चिकित्सकों, एक वार्ड बॉय, एक ब्लॉक मैनेजर को शामिल कर चार सदस्यीय जांच टीम का गठन भी किया है। टीम को दो दिन में जांच रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं।
एसएनसीयू होती तो बच जाती जान
सीएचसी में नवजात बच्चों को रखने की खास व्यवस्था नहीं थी। यदि अस्पताल में एसएनसीयू होती तो नजवात जीवित होते। लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस से भी बच्चों की जान बच सकती थी।
Iसिखैड़ा सीएचसी में जन्मे दो नवजातों में एक के गले पर अवरनाल अटकी थी, दूसरे बच्चे को सांस लेने में अधिक समस्या थी। ऑक्सीजन सपोर्ट पर बच्चों को अस्पताल और एंबुलेंस में लिया गया था। जांच में बिजली आपूर्ति, जनरेटर, ऑक्सीजन संबंधी कमियां नहीं मिली हैं। परिजनों ने भी ऐसी कोई समस्या नहीं बताई है। -डॉ.सुनील त्यागी, सीएमओI