बेशक बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर निजी स्कूल संचालकों पर आए दिन कार्रवाई का भय दिखाते हों, लेकिन नगर का कोई परिषदीय स्कूल आरटीई के मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है। आलम यह है कि दर्जनों स्कूल सिर्फ एक कमरे में चलाए जा रहे हैं।
एक ही कक्ष में कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। जबकि निजी स्कूलों को सभी मानक पूरे करने के बाद ही मान्यता दी जाती है।बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर खुद ही जिले में शिक्षा के अधिकार अधिनियम का मजाक बना रहे हैं।
विभाग के अफसर आए दिन जिले में निजी स्कूलों का निरीक्षण कर उनकी मान्यता, आरटीई के मानकों को पूरा न करने पर सवाल उठाते हैं। कई बार स्कूलों को मान्यता इसलिए नहीं दी जाती क्योंकि स्कूलों में कक्षाओं के अनुरूप कमरे नहीं होते हैं,
लेकिन नगर में चल रहे अधिकांश परिषदीय स्कूलों के संचालन पर गौर करें तो एक भी स्कूल आरटीई के मानकों पर खरा नहीं उतरता है। हालात यह हैं कि अधिकांश परिषदीय स्कूल सिर्फ एक कमरे में चल रहे हैं। नगर पालिका स्थित एक बिल्डिंग में चार स्कूल संचालित हैं।
इन स्कूलों में कक्षा एक से पांच तक के बच्चे एक ही कमरे में बैठकर पढ़ते हैं। इसके अलावा बराही मोहल्ला में भी एक-एक कमरे में दो स्कूल संचालित हैं। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर आरटीई के मानकों को लेकर कितने सजग हैं।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र गुप्ता का कहना है कि कुछ स्कूलों की बिल्डिंग जर्जर हो चुकी थी, इसलिए इन स्कूलों का समायोजन अन्य स्थानों पर कर दिया गया था। इसलिए नगर में एक ही बिल्डिंग में इतने स्कूल चल रहे हैं।