ब्रजघाट गंगानगरी में शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ छठ महापर्व शुरू हो गया। ब्रजघाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया। छठ पूजा के लिए लोगों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।
चार दिवसीय पूजा शुक्रवार को कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन नहाय-खाय के साथ शुरू हुई। पांच नवंबर को पंचमी पर खरना होगा। इस दिन रात्रि को 9.05 बजे तक खीर और भोजन ग्रहण किया जाएगा।
अगले दिन षष्ठी को यमुना किनारे अस्ताचलगामी सूर्य को शाम 5.30 बजे तक अर्घ्य दिया जाएगा। सप्तमी को सात नवंबर को सूर्योदय को अर्घ्य दिया जाएगा। पहले दिन अरवा चावल, चने की दाल, लौकी सब्जी बिना तलीय बनाकर भगवान सूर्य देव की पूजा की गई।
छठ पूजा के लिए घाटों पर इंतजाम कर दिए गए हैं। नगर पंचायत अफसरों ने छठ पूजा के लिए घाट पर साफ-सफाई के इंतजाम किए हैं।
भद्रकाली मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित रमाशंकर तिवारी ने बताया कि चार दिन का यह महापर्व सूर्य साधना का महापर्व है। इसमें डूबते और उगते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है। यह व्रत बहुत कठिन होता है।
आचार्य नरेंद्र बताते हैं कि छठ पूजा का इतिहास महाभारतकालीन है। कुंती ने सूर्य की अराधना की थी। मान्यता है कि छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं। जीव के महत्वपूर्ण अवयवों में सूर्य व जल की महत्ता को मानते हुए भगवान सूर्य की अराधना की जाती है।
यह पूजा गंगा, जमुना, तालाब, नहर या किसी पोखर के किनारे की जाती है। सप्तमी को सुबह पूजा करने के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देकर निर्जला व्रत खोला जाता है।