डीजीपी द्वारा पुलिस को हाईटेक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस को व्हाटस एप और फेसबुक पेज बनाकर जनता को जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। खानापूर्ति के लिए सोशल साइट बनाई गई हैं। इसको अपडेट रखना पुलिस जरूरी नहीं समझती है। इसलिए जिले की जनता का पुलिस की सोशल साइट से मोहभंग हो रहा है।
2012 में हापुड़ पुलिस द्वारा फेसबुक पर पीआरओ सेल हापुड़ के नाम से पेज बनाया गया था। इस पर वर्तमान में लगभग 200 लाइक करने वाले लोग मौजूद हैं। जबकि टिवटर और ब्लाग भी पुलिस ने बनाए हुए हैं। इन पर जुड़ने वाले लोगों की संख्या नाम मात्र की है। दरअसल, पुलिस द्वारा भी इन साइटों पर अपडेट रहने का प्लान आधा अधूरा है।
पुलिस द्वारा गुडवर्क तो डाल दिया जाता है, लेकिन जनता के लिए पुलिस द्वारा सुरक्षा की योजनाओं को नहीं डाला जाता है। जिसके चलते जनता भी इन साइटों पर रुचि नहीं लेती है।