शहर में बूचड़खानों के बंद होते ही इनके आसपास मंडराने वाले आवारा कुत्ते अचानक खूंखार हो गए हैं। मृत पशुओं के अवशेष खाने को नहीं मिलने के कारण कुत्तों के झुंड भूखे भटक रहे हैं। इन इलाकों से जब कोई राहगीर या पालतू जानवर गुजरते हैं कुत्ते बेखौफ होकर हमला करते हैं।
रामपुर रोड पर के आसपास तो हालात सबसे ज्यादा खराब है। 15 दिन में इस मार्ग पर एक पालतू पशुओं और बच्चों पर कुत्ते हमला कर चुके हैं। दरअसल, शहर में कुछ दिनों पहले बड़े पैमाने पर पशुओं का अवैध कटान होता था।
इसके चलते मृत पशुओं के अवशेष सड़क पर इधर-उधर पड़ा रहता था, जिसे आवारा कुत्ते अपना आहार बनाते थे। लेकिन शासन की सख्ती के बाद प्रशासन ने शहर के अवैध बूचडख़ाने बंद करा दिए।
ऐसे में अब कुत्तों को पशुओं के अवशेष मिलना बंद हो गया है। इसके चलते कुत्ते इधर-उधर भटक रहे हैं। रामपुर रोड पर आलम यह है कि कुत्तों का झुंड यदि किसी पालतू पशु को देखते हैं तो उनपर झपटा मार रहे हैं।
इतना ही नहीं इन रास्तों से बच्चों का गुजरना उनकी जान जोखिम में डालने के बराबर है। बुधवार को भी कुत्तों ने सात वर्षीय निखिल, 6 वर्षीय शाहबाज, 7 वर्षीय नदीम को काटकर घायल कर दिया।
एक पखवाड़े की बात करें तो रामपुर रोड पर करीब एक दर्जन बकरियों व आधा दर्जन बच्चों पर कुत्ते हमला कर चुके हैं। इनमें चार बकरियां तो दम तोड़ चुकी है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा.वाईपी सिंह का कहना है कि कुत्ता मांसाहारी प्राणी है,
लेकिन उसमें स्थिति के अनुरूप ढलने की भी खूबी रहती है। इंसानों के बीच रहकर रोटी से भी वह अपना पेट भर लेता है। लेकिन जो कुत्ते जन्म से ही पशुओं के अवशेष से पेट भरते रहे हैं, उन्हें मांस की जरूरी है।
यही कारण है कि भूख से तिलमिलाए कुत्ते अब खूंखार हो गए हैं। ऐसे में हमें सावधानी बरतने की जरूरत है, साथ ही इन कुत्तों को निरंतर अब दूध, रोटी खिलाने से ही इनकी प्रवत्ति को बदला जा सकता है।
नगर पालिका अध्यक्ष मालती भारती का कहना है कि कुत्तों की बढ़ती संख्या को कंट्रोल करने के लिए अभियान चलाकर शहर में घूम रहे आवारा कुत्तों को पकड़वाया जाएगा। पूर्व में भी अभियान चलाकर कुत्तों को पकड़वाया गया है।