गंगानगरी के श्रीकृष्ण आश्रम में श्रीराम कथा सुनाते व्यास। संवाद
ब्रजघाट। गंगानगरी के श्रीकृष्ण आश्रम में चल रही श्रीराम कथा शनिवार को व्यास संत अवधेश महाराज ने भक्तों को राम-रावण युद्ध की कथा सुनाई। रावण के वध पर पंडाल श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। वहीं, भक्तों ने अधर्म पर धर्म की विजय की खुशियां मनाईं।
कथा व्यास ने कहा कि पृथ्वी से अधर्म, पाप और दुष्टों का अंत करने के लिए ही भगवान अवतरित होते हैं। श्रीराम ने भी त्रेता युग में रावण के अत्याचारों से ब्रह्मांड को मुक्ति दिलाने के लिए ही अवतार धारण किया। व्यास ने कहा कि बहन सूर्पणखा के अपमान का बदला लेने के लिए रावण ने माता सीता का हरण कर लिया। जिनकी खोज में श्रीराम हनुमान और वानर-रीछ सेना से मिले। हनुमान-रीछ सेना के दल सीता की खोज में निकले। जहां समुद्र को लांघ कर हनुमान लंका पहुंचे। अशोक वाटिका में पहुंचकर माता सीता को श्रीराम की मुद्रिका भेंट की।
वहीं, रावण ने हनुमान को पकड़वा कर उनकी पूछ में आग लगवा दी। हनुमान लंका दहन कर राम दल में वापस पहुंच गए। सेतु बंधन के उपरांत राम सेना लंका पहुंची। जहां पर हुए भीषण युद्ध में अंततः प्रभु राम ने रावण का वध किया। रावण का वध कर श्रीराम ले विभीषण को लंका का राजा बनाया। कथा व्यास ने कहा कि प्रभु की शरणागत होने के लिए भक्ति, विनम्रता, प्रेम की भावना चाहिए।
कहा कि मनुष्य को उसके द्वारा किए गए पाप कर्मों का फल भी भोगना ही पड़ता है। इसलिए पापकर्म ना करते हुए सत्य, भक्ति व परोपकार के मार्ग पर चलना चाहिए। अशोक कुमार ने बताया कि रविवार को (आज) कथा में भगवान श्रीराम का राज्यभिषेक और उसके उपरांत भंडारे का आयोजन होगा।