हापुड़। जिले की 37 गोशालाओं के करीब 3600 पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था को लेकर पशुपालन विभाग के अधिकारी चिंतित नहीं हैं। जिले की रैंकिंग प्रदेश के आखिरी दस जिलों में पहुंचने से नाराज डीएम कविता मीना ने विभाग के सीवीओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही उनका तीन माह का वेतन रोकने के आदेश दिए हैं।
गोचर की भूमि आमतौर पर ग्राम पंचायत के अधीन होती है। चारे की कमी को पूरा करने के लिए इस भूमि पर मवेशियों के लिए पौष्टिक हरा चारा जैसे जई, बरसीम और लूसर्न आदि की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रयासरत है। इन गोचर भूमि पर अवैध कब्जे हटवाए गए हैं।
वहीं, राज्य सरकारों की ओर से चारा उत्पादन बढ़ाने के लिए चारागाह विकास योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं। उत्तर प्रदेश चारा नीति वर्ष 2025-26 के तहत गो आश्रय स्थल और गोचर भूमि पर पौष्टिक हरा चारा उगाने की योजना है।
इसके लिए 22000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक का अनुदान और निशुल्क बीज, जड़ें प्रदान की जा रही हैं। जिसका उद्देश्य गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाना है।
गोशाला में मौजूद गोवंशों के लिए पहली बार हरा चारा बोने के लिए शासन की ओर से बजट भी जारी किया गया है। जिससे कि पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था जिला स्तर पर हो सके।
शासन स्तर से इसकी मानीटरिंग चल रही है। इसके बाद भी पशुपालन विभाग के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। विभाग के अधिकारियों ने इस दिशा में सही प्रकार से काम ही नहीं किया है। इस पर डीएम ने नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की है।
तहसील गोचर भूमि की उपलब्धता हेक्टेयर में
हापुड़ 3.264
धौलाना 28.012
गढ़मुक्तेश्वर 5.546
कुल 36.822 हेक्टेयर
उबड़-खाबड़ और गड्ढा युक्त हैं भूमि
पशुपालन विभाग के अनुसार, तीनों तहसीलों के एसडीएम ने जो भूमि उपलब्ध कराई है, इसमें से कुछ भूमि पर पहले ही अस्थाई गो आश्रय स्थल का निर्माण हो चुका है। शेष भूमि उबड़-खाबड़ और गड्ढा युक्त है। साथ ही गढ़ में बाढ़ क्षेत्र होने के कारण वर्तमान में उपलब्ध करीब छह से सात हेक्टेयर भूमि ही हरा चारा बोने योग्य है। इस पर नैपियर और अन्य चारा बोने का कार्य चल रहा है। करीब 11 हेक्टेयर भूमि पर हरा चारा बोया गया है।
कोट
जिले की रैंकिंग प्रदेश के अंतिम दस जनपदों में पहुंच गई थी। यह गलत डाटा जारी होने के कारण हुआ था। सही डाटा जारी होने के साथ ही जिलाधिकारी को नोटिस का जवाब भेज दिया गया है। अब जिले की रैंकिंग में भी सुधार हुआ है। जिलाधिकारी ने चारागाह जमीन पर चारा और पौधरोपण कराने के आदेश दिए हैं।
- डॉ. ओपी मिश्रा, सीवीओ