परिवहन विभाग ने दो स्कूली बसों पर की कार्रवाई
- फोटो : अमर उजाला
स्कूलों प्रबंधन को भारी भरकम ट्रांसपोर्ट फीस चुकाने के बाद भी आपके नौनिहाल स्कूली बसों में रामभरोसे यात्रा कर रहे हैं। बेफिक्र होकर अपने नौनिहालों को स्कूली बस में भेजने वाले अभिभावकों के लिए यह खबर बेचैन करने वाली है।
परिवहन विभाग की ओर से स्कूली बसों के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई में यह खुलासा हुआ है कि जिले में केवल दस फीसदी वाहन ही मानकों पर खड़े हैं। इस हालात में किसी भी गंभीर हादसों के खतरों से इंकार नहीं किया जा सकता।
अधिकतर बसों के पास न परमिट हैं ना बसों में बच्चों की सुरक्षा का कोई प्रबंध। फिटनेस, स्पीड गवर्नर, फस्ट एड किट, अनुभवी चालक सारी खामियां अधिकतर स्कूली बसों में है। अधिकतर स्कूल वैन तो अवैध एलपीजी लगी गैस किट से चल रही हैं।
ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। दो सप्ताह पूर्व हापुड़ में एक ऐसी ही स्कूल वैन में आग लग चुकी है जिसमें तीन बच्चे भी झुलस गए थे। एआरटीओ प्रणव झा का कहना है कि स्कूल वाहनों के खिलाफ जारी अभियान में काफी भयावह तस्वीर सामने आ रही है।
अधिकतर वाहन मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। संबंधित स्कूलों को चेतावनी जारी कर स्थिति में सुधार का प्रयास किया जा रहा है।
स्कूल वाहनों के खिलाफ जारी अभियान में एआरटीओ प्रणव झा ने मेरठ रोड स्थित एक स्कूल की दो बसों को मानकों पर खरा न उतरने पर कार्रवाई की। बसों के चालान काटकर उनसे जुर्माना वसूला गया। स्कूल को भी चेतावनी जारी कर सही बसों लगाने के निर्देश दिए गए हैं।