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राहत : 10 हजार किसानों के नलकूप बिलों से हटेगी 800 करोड़ की बकायेदारी, ऊर्जा निगम ने लॉंच किया पोर्टल

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संवाद न्यूज एजेंसी
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हापुड़। ऊर्जा निगम में 220 करोड़ के नलकूप बिल घोटाले में दो दशक बाद हापुड़ के करीब 10 हजार किसानों को बड़ी राहत दिलाने की तैयारी है। निगम द्वारा पोर्टल लांच किया गया है। इस पर 15 दिन के अंदर किसानों को अभिलेख/रसीद, शपथ पत्र जमा करना होगा। इन किसानों पर करीब 800 करोड़ की देनदारी निगम ने निकाली है, जबकि किसानों के पास जमा बिल की रसीदें हैं। आवेदन के बाद इस देनदारी को समायोजित किया जाएगा।

दरअसल, वर्ष 2000 से पहले ही ऊर्जा निगम में नलकूप बिलों का घोटाला शुरू हो गया था। मैनुअल सिस्टम होने के चलते तत्कालीन कर्मचारी और अधिकारी किसानों से पैसा जमा कराते रहे, लेकिन राजस्व कोष में पैसा जमा नहीं कराया। किसानों की किताबों में जमा पैसे की एंट्री भी की गई, लेकिन लेजर में इसका कोई जिक्र नहीं किया। शुरूआत में घोटाले की रकम करीब 220 करोड़ बताई जाती है।
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वर्ष 2004 में खुलासा होने पर इस प्रकरण में एफआईआर भी दर्ज कराई गईं थी। तभी से जांच चली आ रही है, दो दशक में घोटाले की राशि बढ़कर 800 करोड़ के पार पहुंच गई। निगम से जुड़े कुछ अधिकारी घोटाले की राशि को 1200 करोड़ से ज्यादा बताते हैं। बहरहाल, यह राशि किसानों के बिलों में ही जुड़कर आ रही है, जबकि वह पूरा पैसा जमा करा चुके हैं।

वर्ष 2019 में तत्कालीन डीएम अदिति सिंह ने इस मामले को शासन में फिर से उठाया था। जिसके बाद जांच कमेटी गठित हुई। वर्तमान में भी शासन को रिमाइंडर भेजा गया, वर्तमान डीएम अभिषेक पांडेय ने भी अधिकारियों से इस प्रकरण का पूरा ब्योरा लिया। कुल मिलाकर लंबे इंतजार के बाद अब प्रभावित किसानों को राहत दिलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

इस तरह करें आवेदन

ऊर्जा निगम की ओर से एक समाधान योजना लागू की गई है। इसका अधिकारित पोर्टल http://sso.uppcl.org/hapurptw लॉंच किया है, जिस पर एक अप्रैल 1995 के बाद और 31 मार्च 2004 से पहले कनेक्शन लेने वाले किसानों को आवेदन करना होगा। बिल संशोधन के लिए आवेदन पोर्टल पर स्वयं या किसी वाह्य व्यक्ति की मदद से या खंडीय कार्यालय अधिशासी अभियंता, लेखाकार से संपर्क स्थापित कर वांछित समस्त अभिलेखों/रसीदों/शपथ पत्र व अन्य प्रपत्रों को संलग्न करते हुए आवेदन कर सकते हैं। चार नवंबर से 18 नवंबर तक आवेदन किया जा सकेगा।

नाले में बहा दिया गया रिकॉर्ड, लेजरों से फाड़े पेज

नलकूप बिल घोटाले के दौरान इस प्रकरण से जुड़ी रसीदों व अन्य रिकॉर्ड को नाले में बहा दिया गया था। कुछ रिकॉर्ड जलाया भी था। साथ ही लेजर भी पूरे नहीं हैं, ऐसे में जब भी जांच करने के लिए टीम आयी वह अधूरे दस्तावेज देखकर वापस लौट गई। नलकूप बिल घोटाले से आजादी की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। तत्कालीन अधिशासी अभियंता मनोज कुमार, आरपी वर्मा, आदित्य भूषण के समय में तीन बार किसानों से जमा बिलों की रसीदों को जमा कराया जा चुका है। लेकिन अभी तक राहत नहीं मिली, अब पोर्टल लांच होने से उम्मीद बढ़ी है।

वर्ष 2006 में बिलों को संशोधित करने का हुआ था प्रयास

वर्ष 2006 में ऐसे बिलों को संशोधित करने का प्रयास हुआ था। उस समय ओटीएस योजना लागू थी, बहुत से किसानों की पेनाल्टी और जुड़कर आ रही बकायेदारी को खातों से हटाया गया लेकिन, मामला बढ़ा तो फिर से अधिकारियों ने हटाई गई राशि को खातों में जोड़ दिया। उस समय उचित निर्णय लिया गया होता तो घोटाले की राशि इतने बड़े अंकों में नहीं पहुंचती। दस हजार किसानों से जुड़े मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया। इस घोटाले से जुड़े समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किए गए। इस विषय में हुए किसानों के आंदोलन को भी प्रमुखता से उठाया।
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अधीक्षण अभियंता एसके अग्रवाल ने बताया कि एक अप्रैल 1995 से 31 मार्च 2004 के बीच कनेक्शन लेने वाले किसानों के बिलों में यदि गड़बड़ी है तो वह पोर्टल पर आवेदन कर दें। 15 दिन तक पोर्टल खुला रहेगा, इसके बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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