पिलखुवा। कांग्रेस की संगठनात्मक एकजुटता के दावों के बीच पिलखुवा में पार्टी की अंदरूनी खींचतान उस समय खुलकर सामने आ गई, जब सोशल मीडिया पर संचालित कांग्रेस ग्रुप में आपसी बहस तेज हो गई। ग्रुप में शुरू हुई यह बहस धीरे-धीरे तीखे आरोपों और जवाबी टिप्पणियों में बदल गई।
पिलखुवा कांग्रेस कमेटी के नाम से चल रहे सोशल मीडिया ग्रुप में एक कार्यकर्ता ने टिप्पणी करते हुए लिखा कि पार्टी किसी के बाप की बपौती नहीं है और कुछ नेताओं की 1500 से अधिक वोट लाने की भी हैसियत नहीं है। टिप्पणी में कहा गया कि ऐसे लोग पार्टी का रहनुमा बनने का दावा करना बंद करें। इस बयान के बाद ग्रुप में हलचल बढ़ गई। दूसरे कांग्रेसी ने पलटवार करते हुए लिखा कि हापुड़ में बाहर से आने वाले नेताओं की कोई इज्जत नहीं है। जो लंबे कुर्ते पहनकर आते हैं, वे संगठन से लंबे समय से जुड़े हुए भी नहीं हैं। कुछ कांग्रेसी इन बयानों का समर्थन करते नजर आए और खुलकर अपनी सहमति जताई। वहीं, कई कांग्रेसी बीच में उतरे और आपसी बहस को शांत कराने का प्रयास किया।
एक कांग्रेसी ने साफ कहा कि इस तरह की बहस से संगठन की इज्जत घटती है और इसका कोई फायदा नहीं है। उन्होंने सभी से आपसी आरोप-प्रत्यारोप बंद कर अपनी बात जिला अध्यक्ष के समक्ष रखने की अपील की। कुल मिलाकर यह विवाद अब ग्रुप से निकलकर आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है। पिलखुवा कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रजनीश त्यागी ने बताया कि कुछ बातों को लेकर आपस में मनमुटाव था, इसे लेकर बहस हुई थी। बैठक में मनमुटाव को दूर कर दिया गया है। पार्टी में किसी प्रकार की गुटबाजी नहीं है।