उच्च शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए महाविद्यालयों के शिक्षकों के कोचिंग चलाने पर प्रतिबंध के 20 साल पुराने आदेश को नया कर फिर से जारी कर दिया गया है।
सरकार के आदेश के बावजूद लाखों रुपये तनख्वाह लेने वाले प्रोफेसर अब भी कोचिंग चलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। बात जिले के कॉलेजों की करें तो करीब डेढ़ दर्जन टीचर अपने घरों में ही कोचिंग सेंटर चला रहे हैं।
शिक्षा विभाग के अधिकारी भी मूकदर्शक बने हुए हैं। कल्याण सिंह ने अपने कार्यकाल में आदेश जारी किया था कि कॉलेज में पढ़ाने वाले शिक्षक यदि कोचिंग में पढ़ाते मिले तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।
बदलते समय के साथ प्रोफेसर कॉलेजों से ज्यादा कोचिंग सेंटर में समय देने लगे। अब योगी सरकार ने फिर उसी आदेश को लागू कर दिया है। शासनादेश के बाद भी जिले में यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है।
कॉलेजों में गंभीरता से न पढ़ाने के कारण छात्रों को मजबूरी में कोचिंग का सहारा लेना पड़ता है। उक्त प्रोफेसर छात्रों को प्रैक्टिकल आदि में अच्छे अंक दिलाने का भरोसा दिलाकर कोचिंग के नाम पर उनसे मोटी फीस वसूल रहे हैं।
इसके अलावा कुछ प्रोफेसर ऐसे भी हैं जो सत्ताधारी पार्टी और उसके सहयोगी संगठन से जुड़े हैं। वहीं कई प्रोफेसर तो कॉलेजों के आसपास ही कोचिंग चला रहे हैं। आश्चर्य की बात यह है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी इस ओर मूकदर्शक बने बैठे हैं।
जिला विद्यालय निरीक्षक बीके शर्मा का कहना है कि बोर्ड परीक्षा के बाद जल्द ही अपंजीकृत कोचिंग सेंटर पर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए टीम का गठन भी किया जा चुका है।